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अंगिका भाषा क संविधान केरौ ८मो अनुसूची आरू बिहार केरौ दोसरौ राज्यभाषा के श्रेणी मँ शामिल करबाबै ल मुख्यमंत्री, विधि मंत्री सँ माँग
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जनगणना मँ अपनौ नामौ सथें मातृभाषा के कॉलम मँ अंगिका जरूर दर्ज करैइयै : अंगिका निवेदन पत्र, नेपाली गीत गोष्ठी
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अंगिका क संविधान केरौ ८मो अनुसूची मँ डलबाबै आरू बिहार केरौ दोसरौ राजभाषा के रूपौ मँ मान्यता दिलाबै तलक जारी रहतै संघर्ष – प्रीतम विश्वकर्मा कवियाठ
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अंगिका क संविधान केरौ ८ मो अनुसूची मँ आरू बिहार केरौ दोसरौ राज्यभाषा के श्रेणी मँ सूचीबद्ध करबाबै लेली नेपाली गीत-गोष्ठी आयोजित करतै कार्यक्रम
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अपनो माय भाषा अंगिका क संविधान केरौ ८ मो अनुसूची मँ डलबाय क संवैधानिक दर्जा दिलाबै लेली हजारों के भीड़ नँ बनैलकै मानव श्रृंखला

काँग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र मँ भाषा विकास के समुचित प्रवधान सँ अंगिका भाषी उल्लसित

मुंबई ।भजपा के उलट काँग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र मँ  भारतीय भाषा के विकास आरू संरक्षण लेली जे प्रावधान रखलौ गेलौ छै, ओकरा सँ अंगिका भाषी मँ खुशी के माहौल व्याप्त होय गेलौ छै ।

बाँका के अंगिका भाषी श्री दिवाकर प्रसाद नँ ई लेली काँग्रेस क धन्यवाद देलै छै ।

वहीं अंगिका व हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अमरेंद्र के कहना छै कि ई त बहुत बढ़िया छै । हुनी उम्मीद जतैनै छै कि  कांग्रेस ई मुद्दा क लै क अडिग रहतै ।

अखिल भारतीय अंग-अंगिका उत्थानोदलन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गौतम सुमन के कहना छै कि है त कांग्रेस के सकारात्मक पहल छेकै ।एकरौ सराहना करी क है सकारात्मक काम करय लेली हिनका मौका देलौ जाना  चाहियौ ।

हुन्नें भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में भाषा विकास व संरक्षण हेतु समुचित प्रावधान नै रहला सँ अंगिका भाषा भाषी बीच घोर निराशा व्याप्त छै ।

अंगिका के चर्चित कवि श्री त्रिलोकीनाथ दिवाकर नँ जहाँ एकरा अच्छा बतैनै छै । वहीं अंगिका भाषी श्री सौरभ कुमार के कहना छै कि अंगिका के साथ सरकारी स्तर पर  साजिश करी क एकरा मैथिली के उपभाषा बतैलौ जाय रहलौ छै, जे कि बहुत घातक छै ।

श्री सौरभ के प्रश्न के जबाब मँ अंगिका साहित्यकार कुंदन अमिताभ नँ कहलकै कि अंगिका वास्तें हुनकौ दर्द क समझलौ जाबै सकै छै । ई सौसे अंगिका भाषा भाषी के दर्द छेकै कि अंगिका क मैथिली के उपभाषा केना बतलाय देलौ गेलौ छै । एकरौ उत्तर भारत सरकार लगाँ भी नै छै । हाँ एतना कहलौ जाबै सकै छै कि खाली दरभंगा, मधुबनी के कुछ लाख जनसंख्या के भाषा मैथिली क संविधान केरौ ८ मौ अनुसूची मँ डालै वास्तें करोड़ों लोगौ के भाषा अंगिका क एकरौ उपभाषा बताबै के राजनीतिक साजिश रचलौ गेलै । गौरतलब छै कि बाजपेयी जी केरौ भाजपा केरौ शासनकाल मँ मैथिली क ८मौं अनुसूची मँ  शामिल करलौ गेलौ रहै ।

काँग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र मँ  भारतीय भाषा के विकास आरू संरक्षण लेली की वादा करलौ गेलौ छै :

  1. हम भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकार की रक्षा करने का वचन देते हैं। संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 29, और 30 में वर्णित गये भेदभाव रहित, रोजगार में समान अवसर और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना, अधिकारों को बनाये रखने का भी वादा करते हैं।
  2. कांग्रेस वादा करती है कि यह सुनिश्चित करने के लिये नियम बनाये जायेंगे कि दस वर्षों पर होने वाली जनगणना में मातृ भाषा या पसंदीदा बोलने वालो के आंकड़ों की सटीक जानकारी मिले कि किसी भाषा को कितने लोग अपनी मातृभाषा या पसंदीदा बोलचाल की भाषा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
  3. कांग्रेस संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल की गई या नहीं की गई सभी भाषाओं को संरक्षण और बढ़ावा देने का वादा करती है। जहां तक संभव होगा, अनुसूचित जनजातियों और घुमंतू जनजातियों की भाषाओं सहित, ऐसी सभी भाषाओं के उपयोग, को ऐसे इलाकों में, जहां ऐसी भाषाएं लोगों द्वारा व्यापक रूप से बोली जाती हैं, प्रशासन के बोलचाल में प्रोत्साहित करेंगे।
  4. हम सांकेतिक भाषा के उपयोग का समर्थन करते हैं, जिसका इस्तेमाल लाखों दिव्यांगजन अपने रोजमर्रा के जीवन में करते हैं।
  5. कांग्रेस इस सिद्धांत का समर्थन करती है कि स्कूली शिक्षा बच्चे की मातृभाषा में सर्वोत्तम रूप से दी जाती है, और शिक्षा के पसंदीदा माध्यम के रूप में मातृभाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये, राज्य सरकारों की कोशिशों का समर्थन करने का वादा करती है।
  6. हम राज्यों में बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ राज्य की आधिकारिक भाषा(ओं) को सिखाने-पढ़ाने के लिये राज्य सरकारों के प्रयासों का भी समर्थन करेंगे।

भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र मँ भाषा लेली की वादा करलौ गेलौ छै ?

  1. हम भारत की लिखी और बोली जाने वाली सभी भाषाओं तथा बोलियों की वर्तमान स्थिति का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कार्यबल का गठन करेंगें । भारतीय भाषाओं और बोलियों के पुनरूद्धार और संवर्धन के लिए हर संभव प्रयास करेंगें ।
  2. संस्कृत भाषा पर विशेष ध्यान देते हुए हम यह सुनिश्चित करेंगें कि स्कूली स्तर पर संस्कृत की शिक्षा का विस्तार हो । इसके अलावा संस्कृत में अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु शोधार्थियों व विद्दानों के लिए १०० पाणिनि फेलोशिप की शुरूआत करेंगें ।

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