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COVID-19 : बाहर सँ लानलौ तरकारी व समान के उपयोग के सुरक्षित तरीका की छेकै ?
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अंगिका भाषा क संविधान केरौ ८मो अनुसूची आरू बिहार केरौ दोसरौ राज्यभाषा के श्रेणी मँ शामिल करबाबै ल मुख्यमंत्री, विधि मंत्री सँ माँग
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जनगणना मँ अपनौ नामौ सथें मातृभाषा के कॉलम मँ अंगिका जरूर दर्ज करैइयै : अंगिका निवेदन पत्र, नेपाली गीत गोष्ठी
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अंगिका क संविधान केरौ ८मो अनुसूची मँ डलबाबै आरू बिहार केरौ दोसरौ राजभाषा के रूपौ मँ मान्यता दिलाबै तलक जारी रहतै संघर्ष – प्रीतम विश्वकर्मा कवियाठ
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अंगिका क संविधान केरौ ८ मो अनुसूची मँ आरू बिहार केरौ दोसरौ राज्यभाषा के श्रेणी मँ सूचीबद्ध करबाबै लेली नेपाली गीत-गोष्ठी आयोजित करतै कार्यक्रम

भागलपुर । अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद द्वारा भागलपुर केरऽ भगवान पुस्तकालय में आयोजित एगो कार्यक्रम में बितलऽ रविवार क॑ अंग क्षेत्र केरऽ साहित्यकार उमाकांत झा ‘अंशुमाली’ केरऽ प्रथम हिंदी पुस्तक “श्री दुर्गा चरित” केरऽ लोकार्पण सम्पन्न होलै । ई अवसर पर अंगिका केरऽ साहित्यकार गण मौजूद छेलै ।

भागलपुर विश्वविद्यालय केरऽ कुलगीतकार श्री आमोद कुमार मिश्र केरऽ अध्यक्षता में आयोजित ई कार्यक्रम में पुस्तक केरऽ लोकार्पण पाकुड़ महाविद्यालय केरऽ सेवानिवृत हिंदी प्राध्यापक डॉ. मनमोहन मिश्र न॑ करलकै । कार्यक्रम केरऽ उदघाटन डा. मधुसूदन झा न॑ करलकै । मुख्य अतिथि छेलै डा. प्रेम चंद पाण्डेय तथा विशिष्ट अतिथि द्वय छेलात साथी सुरेश सूर्य आरू महेन्द्र निशाकर । अतिथि सिनी केरऽ स्वागत डॉ. आनन्द कु. झा “बल्लू” न॑ करलकै । अंगिका केरऽ वरिष्ठ साहित्यकार नवीन निकुंज न॑ मंच संचालन करलकै ।

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डॉ. मनमोहन मिश्र न॑ माय दुर्गा तत्व केरऽ गूढ रहस्यऽ प॑ प्रकाश डालतें हुअ॑ “श्री दुर्गा चरित” क॑ समाज लेली बहुत उपयोगी ग्रन्थ बतैतें हुअ॑ सब क॑ एकरा अपनाबै के सलाह देलकै ।

श्री आमोद कुमार मिश्र न॑ माय शब्द क॑ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड केरऽ सबसें प्रिय शब्द बतैतें हुअ॑ कहलकै कि “श्री दुर्गा चरित” केरऽ रचना अंशुमाली पर माय केरऽ अपार कृपा के फल छेकै ।

डॉ. पाण्डेय न॑ कहलकै कि श्री दुर्गा चरित में श्री दुर्गा सप्तशती केरऽ मूल आत्मा सुरक्षित छै ।

डॉ. मधु सूदन झा न॑ कहलकै कि सब्भे दिब्य ग्रंथ कठिन भाषा संस्कृत में होला के कारण लोग हिन्दू धर्म केरऽ महानता क॑ समझै सें वंचित रही जाय छै आरू हुनका धर्मांतरुण लेली प्रेरित करलऽ जाय छै । अतः हिन्दी में “श्री दुर्गा चरित “जैसनऽ रचना हुअ॑ आरू ओकरऽ प्रचार-प्रसार हुअ॑ यह॑ समय के जरूरत छै ।

श्री राजकुमार जी न॑ रचना क॑ प्रशंसनीय बतैंत॑ हुअ॑ भविष्य में ई प्रकार के कृति लेली प्रेरित करलकै । श्री साथी सुरेश सूर्य ,श्री महेंद्र निशाकर, श्री एस. के.माथुर, डॉ.मीरा झा, श्री दिव्यांशु आरू श्रीनिकुंज न॑ पुस्तक केरऽ भूरि-भूरि प्रशंसा करतें हुअ॑ भविष्य में भी ऐसनऽ रचना के प्रकाशन लेली प्रोत्साहित करलकै ।

श्री निकुंज न॑ अपनऽ वक्तृत्व कला सें कार्यक्रम केरऽ संचालन में चार चाँद लगाय देलकै । कार्यक्रम में विकास गुलटी, परमानंद प्रेमी, डॉ. अमर सिंह, नरेश ठाकुर, संजय भागलपुरी, उमाकांत भारती, अभय भारती, अंजनी कुमार सुमन, गौतम सुमन आदि मौजूद रहै ।

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