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परम प्रिय मामू आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव क॑ श्रद्धांजलि

— अक्षय मोहन भट्ट—

(मौसम विज्ञानी, मौसम विज्ञान विभाग, भारत सरकार, अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़)

आज साहित्य आकाश में दर्द बहुत है !
कवि हृदय की पीड़ा में सिंचित शब्दों का आभाव बहुत है !
जीवन की प्रथम परिभाषा,
सारस्वत होवे शब्दों की मर्यादा,
विराम लेखनी को मिली,
अंतिम पन्ने पर पूर्ण हस्ताक्षर
रञ्जन तुम्हारी विराम लेखनी में अश्रु का पारावार बहुत है !
साहित्य जगत का गला रुंधता,
शब्द नहीं हैं कवि शब्द ढूंढता,
मग शाकद्वीपी के रत्न रञ्जन,
हुए ओझल ,रह गयीं शेष चक्षु क्रंदन,
यादें शेष अब रञ्जन कृति में , नम आंखों में आभार बहुत है !
ओज प्रवीण पंडित श्री रञ्जन,
माधर्य बोध के विज्ञ श्री रञ्जन,
सरस्वती पुत्र प्रखर श्री रञ्जन,
श्रद्धावनत हूँ मातुल श्री रञ्जन,
बैकुंठ प्रकाशित आज हुआ होगा, गर्व मुझे अभिमान बहुत है !
आज साहित्य आकाश में दर्द बहुत है !
श्रद्धांजलि —

11.11.2018 *

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