टिकोला चुनतॆं बूतरू

— कुंदन अमिताभ —

उमसलॊ दुपहरी मॆं घामॊ सॆं नहैलॊ
गाछी के छाहुरी मॆं घिरनी नचैतॆं
टिकोला चुनतॆं बूतरू

गाछी मॆ ढेला, पैनॊ के झाँटॊ, बाँसॊ के फाँस
लगाय कॆ टिकोला गिराय के
टिकोला चुनतॆं बूतरू

टकटकी लगाय कॆ फुनगी दन्नॆ
लदलॊ टिकोला गिराय के
टिकोला चुनतॆं बूतरू

पत्ता – पत्ता सॆं बतियैतॆं पत्ता पीछू
नुकैलॊ टिकोला गिराय के
टिकोला चुनतॆं बूतरू .

करकरिया रौदा मॆं बरदा कॆ चरैतॆं
लू केरॊ तपिश पर लाबा ऐन्हॊ फूटतॆं
टिकोला चुनतॆं बूतरू .

मंदिर मस्जिद गिरिजाघर गुरूद्वारा
आपनॊ खिलखिलाहट मॆं समेटनॆ
टिकोला चुनतॆं बूतरू .

Angika Poetry : Tikola Chuntein Bootroo
Poetry from Angika Poetry Book Collection : Sarang
Poet : Kundan Amitabh

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