Post Tagged with: "dhamas"

दूरी

दूरी

दूरी — कुंदन अमिताभ — सहज क॑ सहेजन॑ बिना असहज क॑ सहेजी कहिया तलुक दुनिया सहेजै के नाटक करभो ? मानलिहौं कि तोंय क्षणभर मं॑ अंतरिक्ष नापी लै छहो तड़ातड़ सामुद्रिक गहराई पैठी लै छहो पर हमरा तलक पहुँचै मं॑ एत्त॑ समय केना लागी जाय छहौं ? हम्मं॑ कोय भी हुअ॑ पारै छी तहूँ, तोरऽ पड़ोसी या कोइयो लेकिन अंतरिक्ष केरऽ[Read More...]

रौदा

रौदा

रौदा — कुंदन अमिताभ — उधारो लै ल॑ पड़हौं रौदा त॑ नै हिचकिचाबऽ लै ल॑ आखिर धरती भी त॑ उधारे लेलऽ रौदा पर ही जिंदा छै । Angika Poetry : Rouda Poetry from Angika Poetry Book : Dhamas (धमस) Poet : Kundan Amitabh

कल॑-कल॑

कल॑-कल॑

कल॑-कल॑ — कुंदन अमिताभ — कल॑-कल॑ गरै छै दूध गाय केरऽ थऽन सं॑ दोल भरी जाय छै. कल॑-कल॑ । कल॑-कल॑ टपकै छै बूँद सरंग सं॑ सागर भरी जाय छै. कल॑-कल॑ । कल॑-कल॑ बिखरै छै चाँदनी चान सं॑ धरती तरी जाय छै दिल बहुराय छै कल॑-कल॑ । कल॑-कल॑ भरै छै आग सीना मं॑ मानव के जोद्दा बनी जाय छै देशऽ के[Read More...]

गीढ़ऽ

गीढ़ऽ

गीढ़ऽ — कुंदन अमिताभ — खोली ल॑ गीढ़ऽ तभिये तरान छौं । खोलै छहो किताब त॑ गीढ़ऽ खोलऽ चलाबै छहो जुबान त॑ गीढ़ऽ खोलऽ । चलाबै छहो कलम त॑ गीढ़ऽ खोलऽ खंगारै छहो मऽन त॑ गीढ़ऽ खोलऽ । खोलऽ हवा खोलऽ पानी खोलऽ रौदा खोलऽ चाँदनी । खोलऽ धरती खोलऽ सरंग सब छै तंग छेड़ऽ जंग । नै अब॑ चिढऽ[Read More...]

की छेकै जिनगी

की छेकै जिनगी

की छेकै जिनगी — कुंदन अमिताभ — की छेकै जिनगी ? बस तनी देर पलाश फूलऽ सं॑ बात कर॑ द॑ झब-झब मंजर के खूशबू मनऽ के कोना मं॑ जौरऽ कर॑ द॑ बबूली के काँटऽ सं॑ ताड़ऽ पत्ता के घिरनी नचाब॑ द॑। बस तनी देर निहार॑ द॑ कूँड़ऽ चली रहलऽ छै लहाब॑ द॑ तमसलऽ रौदा मं॑ घामऽ सं॑ तरान ल॑ लीखी[Read More...]

डडीर

डडीर

डडीर — कुंदन अमिताभ — ऐन्जां सं॑ जे लौकै छौं पातरऽ – पातरऽ टांगुर – मांगुर डडीर लगीच गेला पर बनी जाय छै झरना जे जीवन क॑ समेटी क॑ चूरू मं॑ उतरी रहलऽ छै स्वर्ग सं॑ धरती पर झरी – झरी क॑ जीवन बाँचै ल॑ धरती क॑ । डडीर पारलऽ छै जन्न॑ – तन्न॑ भाग्यऽ के खाली पहचानै के जरूरत[Read More...]

झुकै नै देशऽ के धजा

झुकै नै देशऽ के धजा

झुकै नै देशऽ के धजा — कुंदन अमिताभ — कण-कण मं॑ अलख जगाबऽ मानव सं॑ दानव क॑ भगाबऽ फर्ज आपनऽ आपन्है प॑ लादऽ झुकै नै देशऽ के धजा सँभालऽ । पल प्रतिपल नै लोर बहाबऽ समर भूमि मं॑ आगू आबऽ डेग-डेग पर धूल चटाबऽ दुश्मन क॑ रणछोड़ बनाबऽ । विश्वासऽ सं॑ अलग भ॑ रहलै बलिदानऽ सं॑ विलग भ॑ रहलै नव[Read More...]

टंडेल

टंडेल

टंडेल — कुंदन अमिताभ — बसबिट्टी केरऽ छाहरी मं॑ नद्दी लगाँ बंसी ल॑ क॑ बैठलऽ छै गामऽ के छौरा बंसी मं॑ छै मजगूत डोरऽ डोरऽ मं॑ छै चोखऽ खुद्दन खुद्दन मं॑ छै माँटी तरऽ सं॑ निकाललऽ हदियैलऽ जोंकटी जोंकटी केरऽ गंध पानी तरऽ मं॑ सगरे पसरी रहलऽ छै मछरी सूँघी क॑ ऐतै जोंकटी क॑ हपकन मारतै खुद्दन मं॑ खुद बझलऽ चल्लऽ[Read More...]

भकजोगनी

भकजोगनी

भकजोगनी — कुंदन अमिताभ — जूगनू कहऽ चाहे भकजोगनी हरदम जुगजुगाबै छै भक सं॑ भकभकाबै छै जंगल झाड़ी मं॑ घऽर आरू बाड़ी मं॑ जन-मन टटोलै छै सम्हरी-सम्हरी बोलै छै जोहै छऽ बाट भोर होय केरऽ छोड़ऽ इ धात नाश होय केरऽ जोधा बनी क॑ आबऽ जोश भरी लाबऽ जौरऽ होय क॑ आबऽ गुज-गुज अन्हरिया मं॑ सूरज नया उगाबऽ । Angika[Read More...]

अंशऽ बरै छै

अंशऽ बरै छै

अंशऽ बरै छै — कुंदन अमिताभ — हल्ला – गुल्ला नै करऽ हो अंशऽ बरै छै भोकार-ढकार नै पारऽ हो अंशऽ बरै छै । जमीनऽ पर नै, रह॑ द॑ तनी देर सपना मं॑ भरम मौसतऽ के देखी तोरऽ अंशऽ बरै छै । झरखलऽ जाय छै पर बतलाबै छो चरफरऽ जंगल मं॑ बस्ती के रफ्तार देखी अंशऽ बरै छै । हर बाथै[Read More...]