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अंगिका साहित्य कला मंच केरऽ पदाधिकारी मनोनीत

भागलपुर। गत दू अगस्त क॑ अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच केरऽ राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन झा आरू राष्ट्रीय महामंत्री हीरा प्रसाद हरेंद्र न॑ मंच केरऽ राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियऽ के नामऽ के  घोषणा करन॑ छै । जेकरा मं॑ विद्यावाचस्पति आमोद कुमार मिश्र, दिनेश तपन, ब्रह्म देव मंडल क॑ संरक्षक, राजकुमार क॑ कार्यकारी अध्यक्ष, ब्रह्मदेव नारायण सत्यम, राकेश पाठक, परमानंद प्रेमी,[Read More...]

by August 4, 2016 Comments are Disabled Angika News
मतरसुन्न लहर

मतरसुन्न लहर

मतरसुन्न लहर — कुंदन अमिताभ — समुंदर केरॊ गर्भ सॆं उठी करगी सॆं टकराबै छै – मतरसुन्न लहर केकरो नै सुनै छै खाली आपनॊ सुनाबै छै – मतरसुन्न लहर दूर सॆं शांत करीब सॆं चंचल नजर आबै छै – मतरसुन्न लहर ढेंस लॆ -लॆ कॆ चट्टान कॆ ललकारै छै – मतरसुन्न लहर घहरी करी सब पर कहर बरपाबै छै –[Read More...]

जिल्द

जिल्द

जिल्द — कुंदन अमिताभ — जीवन तोरॊ हमरॊ एगॊ किताब ऐन्हॊ उपहार इ उपहार ढकलॊ छै जिल्दॊ सॆं जिल्द बड़ा ही नाजुक छै उपहार कॆ ठीक सॆं राखै लेली जरूरी छै जिल्द कॆ ठीक सॆं रखना ऐन्हॊ नै हुऎ कि जिल्दॊ सथॆं उपहार भी नष्ट होय जाय भगवान केरॊ देलॊ इ अमूल्य शरीर एगॊ जिल्द ही तॆ छेकै वातावरण परिवेश[Read More...]

कार्बाईड सॆं पकलॊ आम

आम तोरा सॆं डॊर लगै छै

आम तोरा सॆं डॊर लगै छै    — कुंदन अमिताभ — आम तोरा सॆं कहलॊ नै जाय छै आम  अबॆ तोरा सॆं डॊर लगै छै टिकोला  कैरी तलक  तॆ ठीक छै पना चटनी अचार  भी नीक छै कार्बाइड सॆं  पाकलॊ -घुललॊ  लाल सिंदुरी आम पर चोभै मॆं जी हद तलक हदियाबै छै आम तोरा सॆं कहलॊ नै जाय छै आम  अबॆ तोरा[Read More...]

बनभुटका

बनभुटका

बनभुटका — कुंदन अमिताभ — मामा केरॊ पुष्टा पॆ लागलॊ झारी मॆं लूधलॊ बनभुटका के तोड़ी लै छै  रोजे के रोज ? झारी मॆं बनभुटका  ऐलॊ छै बड़ी जोर कोनॊ करिया भुजंग  तॆ कोनॊ लाल टेस कोनॊ पीरॊ-पीरॊ तॆ कोनॊ रेघा वाला हरिहर मामा केरॊ पुष्टा पॆ लागलॊ झारी मॆं लूधलॊ बनभुटका के तोड़ी लै छै  रोजे के रोज ? परबैतनी सॆं पूछैं के तोड़ी[Read More...]

अन्याय  असहज

अन्याय असहज

अन्याय असहज — कुंदन अमिताभ — अन्याय करना जों पाप छेकै तॆ अन्याय सहना भी कम बड़ॊ पाप नै. अन्याय असहज कृति छेकै आरू अन्याय सहना आसान भी नै छै अन्याय सहना आसान भी नै छै प्रभावित चुप्प रहै छै ओकरा अन्यायी के हरकत पॆ तरस आबै छै अन्यायी के साथ ओकरॊ अपनत्व के संबंध रहै लेकिन स्वार्थ आरू बहकावा[Read More...]

विकास धरपट

विकास धरपट

विकास धरपट — कुंदन अमिताभ — विकास तॆ खूब होलॊ छै हिन्नॆ ! हिन्नॆ कुछ सालॊ मॆं विकास धरपट होलॊ छै ! बेरोजगारी कमलॊ छै – पलायन बढ़लॊ छै जनसंख्या कमलॊ छै – लङका-बच्चा बढ़लॊ छै दूरी घटलॊ छै – परिवहन के साधन बढ़लॊ छै विकास तॆ खूब होलॊ छै हिन्नॆ ! हिन्नॆ कुछ सालॊ मॆं विकास धरपट होलॊ छै[Read More...]

टिकोला चुनतॆं बूतरू

टिकोला चुनतॆं बूतरू

टिकोला चुनतॆं बूतरू — कुंदन अमिताभ — उमसलॊ दुपहरी मॆं घामॊ सॆं नहैलॊ गाछी के छाहुरी मॆं घिरनी नचैतॆं टिकोला चुनतॆं बूतरू गाछी मॆ ढेला, पैनॊ के झाँटॊ, बाँसॊ के फाँस लगाय कॆ टिकोला गिराय के टिकोला चुनतॆं बूतरू टकटकी लगाय कॆ फुनगी दन्नॆ लदलॊ टिकोला गिराय के टिकोला चुनतॆं बूतरू पत्ता – पत्ता सॆं बतियैतॆं पत्ता पीछू नुकैलॊ टिकोला[Read More...]

महज्जर

महज्जर

महज्जर —– कुंदन अमिताभ —– महज्जर छेकै भाय लोगॊ कॆ समझाना – महज्जर तनी – तनी बातॊ पर फिकिर आजकॊ फिकिर कल का लेली फेरू काल की करभॊ  ? कालकॊ फिकिर काल करॊ  नॆ आय  कैन्हॆ करै छौ  ? आजकॊ फिकिर कल कॆं तॆ नाशबॆ करथौं आजकॆ भी चौपट करी देथॊं .   महज्जर छेकै भाय लोगॊ कॆ समझाना – महज्जर फिकिर  मतलब  सुरूज[Read More...]

कैन्हॆं कि

कैन्हॆं कि

कैन्हॆं कि —– कुंदन अमिताभ —– कैन्हॆं कि जुबान छै हमरॊ बेजुबान या कि जुबान होथौं छियै हम्मॆं बेजुबान एकरॊ की मतलब – हमरा चुप्पे रहना छै ? कहना छै हमरौ बहुत कुछ कहना छै. कैन्हॆं कि जुबान छै हमरॊ बेजुबान या कि जुबान होथौं छियै हम्मॆं बेजुबान एकरॊ की मतलब – की हम्मॆं केखरौ सॆं डरै छियै? सोचै छियै[Read More...]