Post Tagged with: "angika language"

अंग देश केरॊ स्थानीय कलाकारॊ सीनी कॆ प्राथमिकता मिलतै ‘ऐलै हो मिलन के बेला’ मॆं

अंग विश्व सांई छाया बैनर तलॆ नवनिर्माणाधीन अंगिका फिल्म,’ ऐलै हो मिलन के बेला ‘ केरॊ निर्माण मॆं अंग देश केरॊ स्थानीय कलाकारॊ सीनी कॆ प्राथमिकता देलॊ जैतै. अंगिका फिल्म ‘ ऐलै हो मिलन के बेला ‘जुलाई-2014 तक रिलीज होय जैतै. इ कहना छै  फिल्म केरॊ निर्माता-निदेशक  राजीव रंजन दास के. अंगिका.कॉम सॆं बातचीत करतॆं हुऎ श्री राजीव रंजन दास नॆ कहलकै कि अंग देश क्षेत्र मॆं काफी प्रतिभावान कलाकार सीनी  छै, जेकरॊ प्रतिभा के सही उपयाग नै होय रहलॊ छै. ऐन्हॆ प्रतिभा सभ कॆ पहचान करी कॆ ओकरा अंगिका फिल्म उद्योग सॆं जोड़ै के जरूरत छै. सही प्रतिभा के खोज लेली हुनी अंग क्षेत्र के विभ्न्न भागॊ के व्यापक दौरा भी करलकै. ‘ ऐलै हो मिलन के बेला ‘ मॆं स्थानीय कलाकार, गौरव गर्ग, कौशल किशार मिश्रा, आरू नवनीता वर्मा, सानवी झा कॆ क्रमशः  मुख्य अभिनेता आरू अभिनेत्री के रोल मिलै के संभावना छै. हालाँकि मुख्य अभिनेत्री के नाम तय करना अभी शेष छै. श्री राजीव रंजन दास के अनुसार मेन हिरोइन के तलाश जल्दिये पूरा होय जैतै.… Read More

चार-चार अंगिका फिल्म निर्माण के राजीव रंजन दास केरॊ महत्वाकांक्षी योजना

चार-चार अंगिका फिल्म निर्माण के राजीव रंजन दास केरॊ महत्वाकांक्षी योजना

मुंबई :अंगिका भाषा सिनेमा केरॊ ऐगॊ नया युग  शुरू होय वाला छै जबॆ आबै वाला समय मॆं अंगिका भाषा मॆं एक सॆं बढ़ी कॆ एक उत्कृष्ट आरू मनोरंजक सिनेमा निर्मित होय कॆ सिनेमा घरॊ मॆं प्रदर्शित करलॊ जैतै.  केवल ‘अंग विश्व सांई छाया’ द्वारा ही चार-चार अंगिका फिल्म निर्माण के योजना छै. जेकरा मॆं प्रमुख छै – ‘ऐलै हो मिलन के बेला’, ‘जहियो नै हमरा सॆं दूर’, ‘रंगॊ मॆं तोरे रंगी गेलॊं हो’. एगॊ अन्य फिल्म केरॊ नाम अभी तय होना शेष छै. चारॊ फिल्म केरॊ निर्माता-निदेशक  राजीव रंजन दास केरॊ कहना छै कि नवनिर्माणाधीन अंगिका फिल्म,”ऐलै हो मिलन के बेला” जुलाई-2014 तक रिलीज होय जैतै. श्री  दास कॆ फिल्म निर्माण केरॊ क्षेत्र मॆं एक लम्बा अनुभव छै आरू फिल्म निर्माण केरॊ बारीकी के बड़ा बढ़िया समझ छै. श्री  प्रकाश झा के साथ मुख्य सहायक निर्देशक केरॊ रूप मॆं काम करी चुकलॊ  श्री राजीव रंजन दास कॆ 1993 ई. सॆं ही प्रकाश झा सथॆं काम करै के मौका मिलतॆं रहलॊ छै. हिनकॊ… Read More

अंग माधुरी : दिसंबर-2013 ( बर्ष-45, अंक-1)

अंग माधुरी : दिसंबर-2013 ( बर्ष-45, अंक-1)

अंग माधुरी : दिसंबर-2013  ( बर्ष-45, अंक-1) पढ़ने के लिये क्लिक करें  Angika.com Exclusive : Ang Madhuri : December-2013 संबंधित अंगिका समाचार पढ़ऽ / Read similar Angika News :अंगिका विकिपीडिया (प्रारम्भिक चरण) मॆं आपनॆ सॆं…Double centurion Rohit Sharma blasts India to series winक्या आज प्रधानमंत्री अंगिका को अष्टम अनुसूची में…अंगिका मासिक अंग माधुरी केरऽ प्रकाशिका श्रीमती…Short story writer Alice Munro wins the 2013 Nobel…Deepavali decorations at shopping malls reflect…अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्यPranab Mukherjee condoles death of renowned Hindi…अंगिका को अष्टम अनुसूची में शामिल करने की आनाकानी…इंगलैंड के अंतर्राष्ट्रीय बहुभाषीय संगोष्ठी में…

लिखे हुए नोटों को स्वीकार नहीं किए जाने के बारे में फैलाई गई अफवाह पर ध्यान न दें : भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक ने लोगों से कहा है कि वे एक जनवरी 2014 से लिखे हुए नोटों को स्वीकार नहीं किए जाने के बारे में फैलाई गई अफवाह पर ध्यान न दें। एक अधिसूचना जारी कर रिजर्व बैंक ने कहा है कि बाजार में उड़ रही अफवाह को देखते हुए लोगों से अपील की जाती है कि वे इसका हिस्सा न बनें और अपने नोट का इस्तेमाल बिना किसी डर के करें। केंद्रीय बैंक ने कहा कि नोट पर लिखावट के कारण उसे स्वीकार नहीं करने के बारे में उसके तरफ से कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। इससे पहले के स्पष्टीकरण में रिजर्व बैंक ने बैंकों के कर्मचारियों को नोट पर कुछ नहीं लिखने का निर्देश दिया था। इसमें कहा गया था कि ऐसा देखा गया है कि नोट पर बैंक कर्मचारी ही लिखते हैं, जो आरबीआई की क्लीन नोट पॉलिसी के खिलाफ है। आरबीआई ने समाज के सभी वर्गों से कहा है… Read More

सुखरात मॆं आतिशबाजी सॆं निजात

सुखरात मॆं आतिशबाजी सॆं निजात

हर साल जबॆ सुखरात (दिवाली) आबै वाला रहै छै आरू आबी कॆ चल्लॊ जाय छै, इ मुद्दा चरम चर्चा मॆ रहै छै कि आतिशबाजी आरू आतिशबाजी जनित प्रदूषण सॆं केना निजात पैलॊ जाय. तरह-तरह के तर्क-वितर्क, तरह-तरह के बयानबाजी, तरह-तरह के पाबंदी के दौर चलै छै. तमाम तरह के विनम्र आग्रह भी करलॊ जाय छै. शुरू मॆ एन्हॊ प्रतीत होय छै कि शायद अबरी दाफी आतिशबाजी नियंत्रण मॆं रहतै. एन्हॊ भी अनुमान लगै छै कि बढ़तॆं मँहगाई के चलतॆं एकरा पर कुछू लगाम लगतै. धीर मॊन अधीर होय जाय छै जबॆ सब चीज कॆ धता बतलैतॆं छोटी दिवाली के रात सॆं ही आतिशबाजी केरॊ अंतहीन सॆं नजर आबै वाला दौर शुरू होय जाय छै. करोङॊं रूपया आगिन मॆं झोंकी देलॊ जाय छै. भारतीय क्रिकेट टीमॊ द्वारा विभिन्न अन्तराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, आय.पी. एल. मैच जीतला पर आतिशबाजी केरॊ प्रदर्शन तॆं होतै छै,  पर दिवाली मॆं आतिशबाजी आपनॊ चरम पर रहै छै. एकरा सॆं कि इ  बात  साफ होय  छै कि आतिशबाजी आरो आतिशबाजी जनित… Read More

अंगिका को राजभाषा बनाने की मांग मुखर

अंगिका को राजभाषा बनाने की मांग मुखर

जमशेदपुर : अंगिका जागृति संघ की ओर से रविवार को केबुल टाउन मैदान में पारिवारिक मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, सांसद डा. अजय कुमार, विधायक अरविंद सिंह, रघुवर दास, बिहार के विधायक जावेद इकबाल, कंचन सिंह, एसडी सिंह, विजय खां, रविन्द्र झा, कौशल कुमार सिंह, शिवशंकर सिंह, अजय सिंह, प्रवीण सिंह, विपिन झा, परितोष सिंह, रमन सिंह आदि ने संबोधित किया। समारोह में अंगिका समाज के विकास में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का निर्णय लिया गया। तय हुआ कि अंगिका भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही जमशेदपुर से भागलपुर सीधी रेल सेवा चालू कराने, निर्धन छात्र-छात्राओं के लिए आर्थिक कोष तैयार करने व समाज के निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए आर्थिक कोष तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। कार्यक्रम में पटना की सुप्रसिद्ध लोकगायिका रंजना झा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। इस अवसर पर अंगिका समाज के विकास में महत्वपूर्ण… Read More

अंगिका काव्य और कवि

अंगिका उस अंग महाजनपद की भाषा है, जिसे पुराणों में अंगदेश के नाम से भी जाना गया है, जिस देश :क्षेत्र, की नींव बली के पुत्र अंग ने अपने नाम पर रखी थी और कि जिस चक्रवर्ती अंग के संबंध में यह कथन है कि उसने सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ किया था। ‘अंग समन्तं सर्वतः पृथ्वीं जयन्परीयायाश्वेन च मेध्येनेज इति।’ :ऐतरेय ब्राह्मण-ण्ण्ण्९/८/२१,। चक्रवर्ती सम्राटों की संख्या अंग जनपद में कम नहीं रही है। चक्रवर्ती अंग के ही वंश में पृथु का जन्म हुआ, जो न केवल राजसूय यज्ञ से अभिसिक्त होने वाला प्रथम राजा हुआ, बल्कि अपने यशोगान से प्रसन्न होकर सूत को अनूप देश और मगध को मगध देश दे दिया था। इन पौराणिक कथाओं पर वाद-विवाद हो सकता है, लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि अंग की स्थापना ऋग्वेद काल में ही चुकी थी, इसे एक स्वर से  सभी इतिहासकार स्वीकार करते हैं। :देखें-राधा कृष्ण चैधरी/हिस्टंी आॅफ बिहार/१९५८ पृ.ण्ण्ण्ण्ण्ण्॰, ‘संस्कृति के चार अध्याय’ में… Read More

Final Countdown has begun for the Screening of First Angika Film

Mumbai, April 20, 2007: With the clearance and certificate granted by Censor Board to “Khagaria Vali Bhouji” the final countdown has begun for the first time screening of any Angika language film on Indian silver screens. The film is going to be released in Khagaria town based Cinema hall first on 27th April, 2007. Thereafter it will be screened in number of cinema halls in different parts of Anga region of Bihar, Jharkhand, and West Bengal. It shall also be released in different cinema halls of metro cities like, Mumbai, Delhi, Patna and Calcutta as a part of second phase. Kunal is very much assured of the success of this film. He says “Humrow ummed se bhi badiyan banlow chhai cinema” “The final production of the film is far better than my expectation.” He further says, “From each and every angle, film is contending with any good Hindi Movie.” The title role of this film… Read More

“Khissa Chando-Bihula-Bishari Ke” : Another Angika Film in Pipe Line

“Khissa Chando-Bihula-Bishari Ke” : Another Angika Film in Pipe Line

Mumbai, April 20, 2007: “Khissa Chando Bihula Bishari Ke” would be the next film, which is in the foray for screening shortly on Indian silver screen after “Khagaria Vali Bhouji”. According to the sources, KCBBK is scheduled to be released on May 04, 2007. It is told that KCBBK is the first ever Angika Film which has been granted a Certificate for the release by the Censor Board. Things were quite different some years ago. Films made in Gujarati, Marathi and Punjabi languages ruled in respective states with much success. Other regional films like Bhojpuri films then were nowhere seen. But since 2005, Bhojpuri films began gaining ground. And now it appears that the turn is of Angika Cinema. A rare feat indeed! Angika films are now to suddenly become catch word in Indian cinema. The films are expected to do huge business in terms of success and money return. No other regional language films… Read More

To be a hero in film was my dream since my childhood: Kunal Singh

To be a hero in film was my dream since my childhood: Kunal Singh

Mumbai: 31 March,’07: An imaginative, dedicated, and determined effort of Kunal Baikunth Singh springs in the form of first Angika film, “Khagaria Vali Bhouji.” Kunal says, “To be a hero in film was my dream since my childhood.” Once again, it has been prevailed that great achievements often require long, tortuous, and bitter experiences including certainly some sacrifices. All things are possible to that believeth . The requirement is to never giving up. It is wiser and better always to help than ever despair. There is no failure in giving up, no real fall so long as one still tries. Nevertheless, seeming setbacks only make the strong men wise and motivate to try still harder. Many a time a strong, earnest, and enduring soul has swaged the destiny of not only society and nations but also of humankind. Success for sure is not a matter of luck or genius. Genius that exploding and expanding power,… Read More

error: Content is protected !!