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गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा– ऊचा ऊचा परबत तहि बसहू सबरी बाली । मोरंगि पिच्छ  परिहिण शबरी जीवत गुंजरी माली।। उमत शबरो पागल शबरो माकर गुली गुहाडा । तोहारि पिअ धरिणी नामे सहज सुन्दरी ।। नाना तरूवर मोंउलिल रे गणअत लागें लिडाली । एकेलि सबरी ए वण हिंडइ कर्ण कुंडल वज्रधारी ।। तिअ धाउ खाट पडिला सबेरा महासुहे सेज छाइली । सबर[Read More...]