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हायजैक

हायजैक

हायजैक – कुंदन अमिताभ – गाँव सॆं शहर ऐथैं चौंधियाय जाय छियै हायजैकर हाथॆं हायजैक होय जाय छिऐ- हम्मॆं हमरॊ आपनॊ भाषा अंगिका कॆ छिनी लै छै हमरा सॆं आरू हमरॊ जुबान बंद करी दै छै मुँहॊ कॆ साटी दै छै कहै छै जॊंय जिंदा रहना छौं तॆ अंगिका मॆं बोलना बंद करै लॆ परथौं हर हालत मॆं हम्मॆं हथियार[Read More...]

नथ बुलाक आरू पैजनिया

नथ बुलाक आरू पैजनिया

नथ बुलाक आरू पैजनिया — कुंदन अमिताभ — सजनी जे मिललॆ राहॊ मॆं मन भरमैलॊ छै तोरॊ बात समझ नै ऐल्हौं तोरॊ धात समझ नै ऐल्हौं तोरॊ रीत समझ नै ऐल्हौं तोरॊ गीत समझ नै ऐल्हौं ऐल्हौं तॆ बस —- नथ,बुलाक आरू पैजनिया सूरज अस्त होय कॆ गंगा घाट पहुँचलॊ छै तारा सब देखॊ सोझे अँगना सोझियैलॊ छै ढघरॊ पर[Read More...]

सौभाग्यशाली तोंय

सौभाग्यशाली तोंय

सौभाग्यशाली तोंय — कुंदन अमिताभ — तोंय कत्तॆ सौभाग्यशाली छहॊ तोंय कत्तॆ नसीबवाला छहॊ इ याद रखै के बात छेकै आरू अनुभव करै के भी तभिये तोरा पता चलथौं तोंय कत्तॆ सौभाग्यशाली छहॊ तोंय अक्सर इ भूली जाय छहॊ तोंय भूली जाय छो कि सौभाग्यशाली छहॊ जबॆ भूली जाय छहॊ दुःखी रहै छहॊ इ याद रखै के बात छेकै आरू[Read More...]

बगरॊ

बगरॊ

बगरॊ — कुंदन अमिताभ — बिना हाथ के चोंचॊ सॆ ही तिनका-तिनका चूनै छी चीं-चीं चीं-चीं करी करी कॆ आपनॊ घर कॆ बूनै छी हमरॊ शरीर बड्डी छोटॊ पैखना पर भी ओछॊ छींटॊ गोर करै छै डगमग डगमग गरदा सॆं दाना चूनै छी चीं-चीं चीं-चीं करी करी कॆ आपनॊ घर कॆ बूनै छी नै हमरा खेत खलिहान नै कोनॊ कोठी[Read More...]

हम्मॆ आगू सपना पीछू

हम्मॆ आगू सपना पीछू

हम्मॆ आगू सपना पीछू — कुंदन अमिताभ — हम्मॆं ऐतना तेज दरबन लगैलियै कि होय गेलिऎ हम्मॆ आगू रही गेलै सपना पीछू हम्मॆ आगू सपना पीछू मारी देलियै सबकॆ —— साँप बिच्छू सथॆं जोंकटी कॆ भी भेड़िया लकड़बग्घा सथॆं गाय कॆ भी कृत्रिम साधन अपनाय लेलियै अन्न उत्पादन के – दुग्ध उत्पादन के भी कि होय गेलिऎ हम्मॆ आगू रही[Read More...]

चन्नी पत्ता

चन्नी पत्ता

चन्नी पत्ता — कुंदन अमिताभ — अबरी गाँमॊं सॆं भौजी नॆ भेजाय देनै रहै दू मुठ्ठा चन्नी के पत्ता आरू तनी टा चन्नी के बीया कहलबैनॆ छेलै कि पत्ता तॆ नै चलथौं जादा बीया बूनी लिहॊ गमला मॆं चलतें रहथौं सब दिना डाली कॆ खैतें रहियॊ मछरी मॆं दू दफा मछरी बनलै आरू चन्नी के पत्ता खतम हिन्नॆ चन्नी के[Read More...]

कार्बाईड सॆं पकलॊ आम

आम तोरा सॆं डॊर लगै छै

आम तोरा सॆं डॊर लगै छै    — कुंदन अमिताभ — आम तोरा सॆं कहलॊ नै जाय छै आम  अबॆ तोरा सॆं डॊर लगै छै टिकोला  कैरी तलक  तॆ ठीक छै पना चटनी अचार  भी नीक छै कार्बाइड सॆं  पाकलॊ -घुललॊ  लाल सिंदुरी आम पर चोभै मॆं जी हद तलक हदियाबै छै आम तोरा सॆं कहलॊ नै जाय छै आम  अबॆ तोरा[Read More...]

डर

डर

डर   — कुंदन अमिताभ —   दोसरा कॆ डराबै  वाला इंसान सबसॆं जादे डरपोक होय छै जे डराबै छै – ओकरा  आस्तॆं -आस्तॆं डराबै मॆं मजा आबै लागै छै डरैतॆं - डरैतॆं  वू  अपराधी बनी जाय छै – ओकरा पता भी नै चलै छै जे डरै छै – वू आस्तॆं -आस्तॆं डराबै वाला सॆं परहेज करॆ लागै छै डरतॆं - डरतॆं[Read More...]

छमा

छमा

छमा   — कुंदन अमिताभ —   छमा करना कोनॊ अपराध नै छेकै छमा करना निंदनीय  कृत्य नै छेकै छमा करना  पथभ्रष्टक नै छेकै छमा करना कोनॊ  साधारण बात नै छेकै नै छमा करना हुऎ सकॆ छै.   छमा करला सॆं केकरॊ उद्धार होय छै छमा करला सॆं कोय  परिष्कृत होय छै छमा करला सॆं प्रदूषित वातावरण सॆं मुक्ति मिलै छै[Read More...]

बढ़ी चललै बिहार

बढ़ी चललै बिहार

बढ़ी चललै बिहार    — कुंदन अमिताभ — बढ़ी चललै बिहार चली चललै बिहार चलतॆं रही कॆ अबॆ आरू आगू बढ़ाना छै. बढ़ी चललै बिहार एगॊ प्रगतिशील विचार जेकरॊ माध्यम सॆं होतै  विकासॊ के दृष्टिपत्र तैयार जे बनतै  लोगॊ कॆ  विकास योजना सॆं जोड़ै के आधार बढ़ी चललै बिहार चली चललै बिहार चलतॆं रही कॆ अबॆ आरू आगू बढ़ाना छै. छेकै समावेशी विकास[Read More...]