Post Tagged with: "गीतिका"

गीतिका – धमपा / धर्मपा

गीतिका – धमपा / धर्मपा

गीतिका – धमपा / धर्मपा– कम-कुलिश माँझे भमई लेली । समता जोएँ जलिल चण्डाली ।। डाह डोम्बिधरे लागेलि आगी । ससहर लइ सिंचुहु पाणी।। णउ खरे जाला धूम ण दी सइ । मेरू सिहर लइ गअण पइ सइ ।। दाढइ हरिहर ब्राह्मण नाडा (भठ्ठा) । दाढँइ नव-गुण शासन पाडा (पट्ठा) ।। भणइ धाम फुड़ लेहुरे जाणी । पंचनाले ऊठे (ऊध) गेल[Read More...]

गीतिका – कणहपा

गीतिका – कणहपा

गीतिका – कणहपा– मण तरू पाँच इन्द्रि तसू साहा । आसा-बहल परत फल बाहा ।। वर गुरू वअणों कुठारे छिज्जअ । कणह भणइ तरू  पुणणइजअ।। बढइ सो तरू सुभासुभपाणी । छेवइ विदुजन गुरूपरिमाणी ।। जो तरू छेवइ भेउ ण जाणइ । सडि पडिआँ मुठा ना भव माणइ ।। सुणणा तरूवर गऊण कुठार । छेवई सो तरू मूल ण डाल ।।[Read More...]

गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा– ऊचा ऊचा परबत तहि बसहू सबरी बाली । मोरंगि पिच्छ  परिहिण शबरी जीवत गुंजरी माली।। उमत शबरो पागल शबरो माकर गुली गुहाडा । तोहारि पिअ धरिणी नामे सहज सुन्दरी ।। नाना तरूवर मोंउलिल रे गणअत लागें लिडाली । एकेलि सबरी ए वण हिंडइ कर्ण कुंडल वज्रधारी ।। तिअ धाउ खाट पडिला सबेरा महासुहे सेज छाइली । सबर[Read More...]

गीतिका – सरह / सरहपा

गीतिका – सरह / सरहपा

गीतिका – सरह / सरहपा– नाद न बिन्दु न रवि-शशि मंडल चीआ राअ सहावे मूकल । उज्ररे उजु छडि मा लेहु बंक, निउडि बोहिमा जन्हुरे लंक ।। हाथेर कंकण मा लेहुं दप्पण अपने आपा बुझतु निअयण । पार उठ्यारें सोई मजिई, दुज्जण संगे अवसरि जई ।। बाम-दहिण जो खाला दिखाला, सरह भणइ बप । उजु चट भाला ।। Angika Poetry[Read More...]