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गीढ़ऽ

गीढ़ऽ

गीढ़ऽ — कुंदन अमिताभ — खोली ल॑ गीढ़ऽ तभिये तरान छौं । खोलै छहो किताब त॑ गीढ़ऽ खोलऽ चलाबै छहो जुबान त॑ गीढ़ऽ खोलऽ । चलाबै छहो कलम त॑ गीढ़ऽ खोलऽ खंगारै छहो मऽन त॑ गीढ़ऽ खोलऽ । खोलऽ हवा खोलऽ पानी खोलऽ रौदा खोलऽ चाँदनी । खोलऽ धरती खोलऽ सरंग सब छै तंग छेड़ऽ जंग । नै अब॑ चिढऽ[Read More...]

की छेकै जिनगी

की छेकै जिनगी

की छेकै जिनगी — कुंदन अमिताभ — की छेकै जिनगी ? बस तनी देर पलाश फूलऽ सं॑ बात कर॑ द॑ झब-झब मंजर के खूशबू मनऽ के कोना मं॑ जौरऽ कर॑ द॑ बबूली के काँटऽ सं॑ ताड़ऽ पत्ता के घिरनी नचाब॑ द॑। बस तनी देर निहार॑ द॑ कूँड़ऽ चली रहलऽ छै लहाब॑ द॑ तमसलऽ रौदा मं॑ घामऽ सं॑ तरान ल॑ लीखी[Read More...]