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by July 4, 2015 Comments are Disabled Angika, Angika Language, Angika Literature
अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत : सोहर

सोहर -1

अंगिका लोक साहित्य : अंगिका संस्कार गीत  Angika Language Folk Literature : Angika Ceremonial Lyrics सोहर -1 जुअवा खेलतें तोहें पिअबा छेका, कि मोरा राजा छेका  हे । पिअवा, एकेगो अमोलवा तों लगैता, कि टिकोलबा हम चाखतें हे ।।1।। भनसा पैसलि तोहों धनि छेका, धनि दुलरैतिन  हे । धनि, एकेगो बलकबा तों बिऐतिहॆ, सोहरबा हम सुनतॆं हे ।।2।। अँगना बोहारइत तोहें[Read More...]

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत : सोहर

सोहर : खेलवना -1

अंगिका लोक साहित्य : अंगिका संस्कार गीत Angika Language Folk Literature : Angika Ceremonial Lyrics  सोहर : खेलवना -1 आजु सुमंगल दायक, सब विधि लायक हे । ललना रे, जनमल होरिला, आनंद उर छायल हे ।।1।। दुअरे बाजै बधावा, एँगना गाबै सोहर हे । ललना रे, राजा दसरथ के मन भेल हुलास, नौबत झरै हे ।।2।। होरिला के सुनि के जलम,[Read More...]

ओलती

झरिया मॆं ओलती

झरिया मॆं ओलती — कुंदन अमिताभ — साँस आपनॊ सामान्य वेग सॆं चली रहलॊ छै निश्चित दिशा मॆं कखनू शरीर केरॊ भीतर कखनू शरीर सॆं बाहर इच्छा आपनॊ असामान्य गति सॆं बढ़ी रहलॊ छै अनिश्चत दिशा मॆं एगॊ बेढभ काया ऐन्हॊ असामान्य रूपॊ मॆं भविष्य केरॊ सुखद चेहरा मनॊ मॆं बनैतॆं सामान्य आरू असामान्य टकराबै छै बादल ऐन्हॊ करकराबै छै पड़ै[Read More...]

नथ बुलाक आरू पैजनिया

नथ बुलाक आरू पैजनिया

नथ बुलाक आरू पैजनिया — कुंदन अमिताभ — सजनी जे मिललॆ राहॊ मॆं मन भरमैलॊ छै तोरॊ बात समझ नै ऐल्हौं तोरॊ धात समझ नै ऐल्हौं तोरॊ रीत समझ नै ऐल्हौं तोरॊ गीत समझ नै ऐल्हौं ऐल्हौं तॆ बस —- नथ,बुलाक आरू पैजनिया सूरज अस्त होय कॆ गंगा घाट पहुँचलॊ छै तारा सब देखॊ सोझे अँगना सोझियैलॊ छै ढघरॊ पर[Read More...]

सौभाग्यशाली तोंय

सौभाग्यशाली तोंय

सौभाग्यशाली तोंय — कुंदन अमिताभ — तोंय कत्तॆ सौभाग्यशाली छहॊ तोंय कत्तॆ नसीबवाला छहॊ इ याद रखै के बात छेकै आरू अनुभव करै के भी तभिये तोरा पता चलथौं तोंय कत्तॆ सौभाग्यशाली छहॊ तोंय अक्सर इ भूली जाय छहॊ तोंय भूली जाय छो कि सौभाग्यशाली छहॊ जबॆ भूली जाय छहॊ दुःखी रहै छहॊ इ याद रखै के बात छेकै आरू[Read More...]

बगरॊ

बगरॊ

बगरॊ — कुंदन अमिताभ — बिना हाथ के चोंचॊ सॆ ही तिनका-तिनका चूनै छी चीं-चीं चीं-चीं करी करी कॆ आपनॊ घर कॆ बूनै छी हमरॊ शरीर बड्डी छोटॊ पैखना पर भी ओछॊ छींटॊ गोर करै छै डगमग डगमग गरदा सॆं दाना चूनै छी चीं-चीं चीं-चीं करी करी कॆ आपनॊ घर कॆ बूनै छी नै हमरा खेत खलिहान नै कोनॊ कोठी[Read More...]

हम्मॆ आगू सपना पीछू

हम्मॆ आगू सपना पीछू

हम्मॆ आगू सपना पीछू — कुंदन अमिताभ — हम्मॆं ऐतना तेज दरबन लगैलियै कि होय गेलिऎ हम्मॆ आगू रही गेलै सपना पीछू हम्मॆ आगू सपना पीछू मारी देलियै सबकॆ —— साँप बिच्छू सथॆं जोंकटी कॆ भी भेड़िया लकड़बग्घा सथॆं गाय कॆ भी कृत्रिम साधन अपनाय लेलियै अन्न उत्पादन के – दुग्ध उत्पादन के भी कि होय गेलिऎ हम्मॆ आगू रही[Read More...]

कार्बाईड सॆं पकलॊ आम

आम तोरा सॆं डॊर लगै छै

आम तोरा सॆं डॊर लगै छै    — कुंदन अमिताभ — आम तोरा सॆं कहलॊ नै जाय छै आम  अबॆ तोरा सॆं डॊर लगै छै टिकोला  कैरी तलक  तॆ ठीक छै पना चटनी अचार  भी नीक छै कार्बाइड सॆं  पाकलॊ -घुललॊ  लाल सिंदुरी आम पर चोभै मॆं जी हद तलक हदियाबै छै आम तोरा सॆं कहलॊ नै जाय छै आम  अबॆ तोरा[Read More...]

डर

डर

डर   — कुंदन अमिताभ —   दोसरा कॆ डराबै  वाला इंसान सबसॆं जादे डरपोक होय छै जे डराबै छै – ओकरा  आस्तॆं -आस्तॆं डराबै मॆं मजा आबै लागै छै डरैतॆं - डरैतॆं  वू  अपराधी बनी जाय छै – ओकरा पता भी नै चलै छै जे डरै छै – वू आस्तॆं -आस्तॆं डराबै वाला सॆं परहेज करॆ लागै छै डरतॆं - डरतॆं[Read More...]