अंगिका लोक साहित्य : अंगिका संस्कार गीत
Angika Language Folk Literature : Angika Ceremonial Lyrics

 सोहर : खेलवना -1

आजु सुमंगल दायक, सब विधि लायक हे ।
ललना रे, जनमल होरिला, आनंद उर छायल हे ।।1।।
दुअरे बाजै बधावा, एँगना गाबै सोहर हे ।
ललना रे, राजा दसरथ के मन भेल हुलास, नौबत झरै हे ।।2।।
होरिला के सुनि के जलम, उछाह माँगै हे ।
ललना रे, माँगै इनाम, से लय घर जैबै हे ।।3।।
बसतर भूसन सब पायल, मन हुलसायल हे ।
ललना रे, होरिला कय दय आसीस, हरसि गुन गाबत हे ।।4।।
राजा राम के जलम भेलै, हिलिमिलि सखि गाबत हे ।
ललना रे, जुग – जुग जियहो सिरीराम अँगने खूब खेलहु हे ।।5।।

(सन्दर्भ ग्रन्थ : अंगिका संस्कार गीत, सम्पादक : पं. वैद्यनाथ पाण्डेय, श्री राधावल्लभ शर्मा, प्रकाशक : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना, प्रकाशन बर्ष : 1969 ई. )
(Reference Book : Angika Sanskar Geet, Editors: Pandit Vaidyanath Pandey, Shri Radhavallabh Sharma, Publisher: Bihar Rashtrabhasha Parishad, Patna, Publication Year : 1969)

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत : सोहर
खेलवना -1

Comments are closed.