अंगिका लोक साहित्य : अंगिका संस्कार गीत 
Angika Language Folk Literature : Angika Ceremonial Lyrics

सोहर -1

जुअवा खेलतें तोहें पिअबा छेका, कि मोरा राजा छेका  हे ।
पिअवा, एकेगो अमोलवा तों लगैता, कि टिकोलबा हम चाखतें हे ।।1।।
भनसा पैसलि तोहों धनि छेका, धनि दुलरैतिन  हे ।
धनि, एकेगो बलकबा तों बिऐतिहॆ, सोहरबा हम सुनतॆं हे ।।2।।
अँगना बोहारइत तोहें चेरिया छेकी, औरो नउरिया छेकी हे ।
ललना , अपन बलकबा पैंचा देहो, पिया रे सुनत सोहर हे ।।3।।
नोनमा से तेलबा रानी पैंचा, कि औरो पैंचा पालट हे ।
रानी, गोदी के बलकबा नहिं पैचा, कि पैंचा नहि मिलत हे ।।4।।
भनसा पैसल तोहें गोतनी, कि गोतनी ठकुराएनि हे ।
गोतनी, अपनो बलकबा पैंचा देहो, पिया रे सुनत सोहर हे ।।5।।
नोनवा से तेलबा गोतनी पैंचा, कि औरो उधार मिलत हे ।
गोतनी, गोदी के बलकबा नहिं पैचा, कि पैंचो नहि मिलत हे ।।6।।
सुपति खेलैतें तोहों ननदो छेकी, ननदो दुलरैतिन हे ।
ननदो, अपनो बलकबा पैंचा देहो, पिआ रे सुनत सोहर हे ।।7।।
नोनवा से तेलबा भौजी पैंचा देबो, औरो उधार देबो हे  ।
भौजी, गोदी के बलकबा नाहिं पैचा, कि पैंचो नाहिं मिलत हे ।।8।।
घर पिछुअरबा बड़हिया भैया, कि तोहिं मोर हित बसु हे ।
बड़ही, काठ के बलकबा तों बनाबॊ, पिआ रे सुनत सोहर हे ।।9।।
काठ के बलकबा कठबूतर, मुँहों से न बोलै हे, नयनमो से न ताकै हे ।
ललना, कैसें के धरबो धीरजबा, करेजबा मोरा सालै हे ।।10।।
मचिया बैठलि तोहें सासु छिकी, सासु ठकुराएनि हे ।
सासु,कौने बरत तोहें कैली, कि पुतर फल पाएलि हे ।।11।।
गलिअहिं कुचिअहिं नहैली, कि सुरूज गोड़ लागलि हे ।
पुतहु, बरत कैलि एतबार, पुतर फल पाएलि हे ।।12।।

(सन्दर्भ ग्रन्थ : अंगिका संस्कार गीत, सम्पादक : पं. वैद्यनाथ पाण्डेय, श्री राधावल्लभ शर्मा, प्रकाशक : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना, प्रकाशन बर्ष : 1969 ई. )
(Reference Book : Angika Sanskar Geet, Editors: Pandit Vaidyanath Pandey, Shri Radhavallabh Sharma, Publisher: Bihar Rashtrabhasha Parishad, Patna, Publication Year : 1969)

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत

अंगिका लोक साहित्य : संस्कार गीत : सोहर

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