पीयै के पानी लेली मारा-मारी

—  कुंदन अमिताभ —

पीयै के पानी केरऽ समस्या दिनों दिन भयावह होलऽ जाय रहलऽ छै. दिनों-दिन बढ़लऽ जाय रहलऽ जनसंख्या के अलावा नदी, जंगल आरू पहाड़ जैसनऽ जलस्त्रोत वाला प्राकृतिक संपदा केरऽ अंधाधुंध दुरूपयोग एकरऽ मूल कारणऽ मं॑ सं॑ चंद आसानी सं॑ समझलऽ जाय वाला कारण छेकै. मनुष्य आरू इतर जीव समुदाय लेली जीवन केरऽ पर्याय मानलऽ जाय वाला पीयै जूकूर पानी केरऽ अपर्याप्त उपलब्धता आस्तं॑-आस्तं॑ आधुनिकता के इ दौर केरऽ भयंकरतम त्रासदी केरऽ आकार ग्रहण करतं॑ नजर आबी रहलऽ छै.

जनसंख्या वृद्धि चलतें आपनऽ देश मं॑ ताजा पानी केरऽ प्रति-व्यक्ति खपत केरऽ स्थिति मं॑ चिंताजनक बदलाव ऐलऽ छै. भारत मं॑ पिछला पचास साल मं॑ प्रति-व्यक्ति पानी केरऽ हिस्सा 3000 क्यूबिक मीटर सं॑ घटी क॑ 1123 क्यूबिक मीटर पर आबी गेलऽ छै. वैश्विक स्तर पर इ हिस्सा वर्तमान मं॑ 6000 क्यूबिक मीटर केरऽ छै.

जरूरत केरऽ हिसाब सं॑ देखलऽ जाय त॑ शहर मं॑ रहै वालां सीनीं गामऽ मं॑ रहै वाला सीनी सं॑ जादा पानी खर्च करै छै. शहरी क्षेत्र मं॑ प्रति व्यक्ति पानी केरऽ जरूरत 135 लीटर के छेकै जबकि ग्रामीण क्षेत्र मं॑ रही रहलऽ प्रति व्यक्ति पानी केरऽ जरूरत मात्र 40 लीटर के छेकै. जेकरऽ मतलब इ छै कि गामऽ के तुलना मं॑ शहरवाला क॑ तीन गुना जादा पानी चाहियऽ.

संयुक्त राष्ट्र केरऽ अनुमान के अनुसार साल 2050 तलक भारत केरऽ शहरी आबादी अखनका सं॑ लगभग डेढ़ गुना बढ़ी जैतै. एना मं॑ पीयै के पानी लेली जे मारा-मारी मचतै ओकरऽ खाली अंदाजा ही लगैलऽ जाब॑ सकै छै.

पीयै के पानी केरऽ कुछ हिस्सा सतहीभूमि जल-स्त्रोत संसाधन (Surface Water Resources) – नदी, झील, झरना आदि सं॑ मिलै छै जबकि शेष भूमिगत जल-स्त्रोत संसाधन (Ground Water Resources)- कुँआ, ट्यूबवेल आदि सं॑ मिलै छै.

लगभग पाँच हजार डैम वाला आपनऽ देश डैम निर्माण के मामला मं॑ विश्व मं॑ खाली चीन आरू अमरीका सं॑ पीछू छै. अंधाधुंध डैम सब बनला सं॑ नदी सं॑ मिलै वाला पीयै के पानी के उपलब्धता प्रभावित होलऽ छै. डैम बनाबै के पीछे मुख्य उद्देश्य सिंचाई आरू बिजली के सुविधा उपलब्ध कराना होय छै. पर सर्वाधिक चिंतनीय बात इ छै जे इ डैम सब सं॑ पानी केरऽ गुणवत्ता पर बुरा असर परै छै.

ट्यूबवेल के माध्यम सं॑ मिलै वाला पानी के अंधाधुंध दुरूपयोग सं॑ जल स्तर चिंताजनक हालत तक नीचं॑ पहुँची चुकलऽ छै. रासायनिक खाद, कीटनाशक दवा आदि केरऽ खेती मं॑ अंधाधुंध उपयोग सं॑ अधिकांश जग्घऽ पर भूमिगत जल-स्त्रोत के पानी पीयै लायक नै रहलऽ छै.

औद्योगिकीकरण भी एगऽ बहुत बड़ऽ कारण छै जेकरऽ कचरा चलतं॑ धरती पर उपलब्ध सीमित मात्रा मं॑ पीयै लायक पानी सतत जहर मं॑ बदली रहलऽ छै.

समय आबी गेलऽ छै कि व्यक्तिगत स्तर पर कुछ ऐन्हऽ प्रयास करलऽ जाय जेकरा सं॑ आबै वाला पीढ़ी क॑ आसानी सं॑ साफ पानी पियै लेली मिल॑ सक॑ आरू मानव समुदाय धरती पर सुरक्षित रूप सं॑ जीवन यापन कर॑ सक॑.

Angika Samvad – Abri Dafi : अंगिका संवाद – अबरी दाफी  : पीयै के पानी लेली मारा-मारी

Columnist (स्तंभकार) : Kundan Amitabh (कुंदन अमिताभ)

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