भोपाल : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली न॑ अंगिका संबंधी जे पहलऽ किताब बर्ष-२०१२ मं॑ प्रकाशित करन॑ छै वू विश्व हिंदी सम्मेलन, भोपाल केरऽ पुस्तक प्रदर्शनी मं॑ दिनांक१०- १२ सितंबर, २०१५  केरऽ दौरान प्रदर्शित करलऽ गेलऽ रहै. विश्व हिंदी सम्मेलन, भोपाल मं॑ साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित अंगिका पुस्तक प्रदर्शित होतं॑ देखी क॑ जे खुशी होलऽ रहै ओकरऽ वर्णन करना आसान नै छै.

बिहार केरऽ अंग क्षेत्र के शेखपुरा जिला केरऽ वरना ग्रामनिवासी श्री कृष्ण मुरारी सिंह ‘किसान’ लिखित इ पुस्तक के नाम छेकै: “अंगिका और कुछ अन्य कहावतें”. इ किताब मं॑ अंगिका केरऽ अलावे छत्तीसगढ़ी, मेवाड़ी, भोजपुरी आरू मगही केरऽ कुछ कहावत सीनी क॑ शामिल करलऽ गेलऽ छै. विषय केरऽ दृष्टि सं इ कहावत केरऽ एगऽ बड़ऽ हिस्सा कृषि आरू खेती संबंधी काम, साधन आरू ग्राम्य-जीवन पर केंद्रित छै. तभियो एकरा मं॑ जीवन केरऽ अन्य छवि भी प्रतिबिंम्बित होय छै. प्रकृति जौरें आम जीवन केरऽ रिश्ता अविछिन्न छै, किताबऽ मं॑ अंकित कहावत सब एकरऽ प्रमाण छै.Angika_Book_Sahitya_Academy_India_1

सचमुच अपना सब केरऽ जीवन मं॑ कहावत केरऽ एगऽ महत्वपूर्ण स्थान छै. कहावत सब आपनऽ ग्रामीण जीवन केरऽ आधार रहलऽ छै. कहावत मं॑ भारतीय संस्कृति केरऽ विभिन्न रूपऽ के दर्शन होय छै. आपनऽ अनुभव आरू व्यवहारिक ज्ञान सं॑ उपजलऽ, समय आरू तरह-तरह के परिस्थिति केरऽ उष्मा सं॑ पकलऽ कहावत सब मानवीय सामाजिक जीवन लेली अनमोल निधि ही छेकै.

किताब केरऽ साम्रगी उच्च कोटि के छै पर वर्तनी संबंधी अशुद्धता खलै वाला छै. भारत सरकार द्वारा मानक वर्तनी चिन्हऽ के प्रयोग करलऽ त॑ गेलऽ छै, जैन्हऽ कि अंगिका.कॉम मं॑ अवग्रह आरू प्रश्लेष के प्रयोग होय छै. परंतु कहीं-कहीं प्रश्लेष केरऽ जग्घऽ पर अवग्रह केरऽ प्रयोग होलऽ छै जे बड़ा ही अटपटा लगै छै.

अंगिका संबंधी पुस्तक प्रकाशन लेली श्री कृष्ण मुरारी सिंह ‘किसान’ केरऽ साथ-साथ साहित्य अकादमी, नई दिल्ली निश्चित रूप सं॑ बधाई केरऽ पात्र छै.

 

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