नथ बुलाक आरू पैजनिया | अंगिका कविता | कुंदन अमिताभ

नथ बुलाक आरू पैजनिया
— कुंदन अमिताभ —

सजनी जे मिलल॑ राहऽ म॑ मन भरमैलऽ छै
तोरऽ  बात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ धात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  रीत समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  गीत समझ नै ऐल्हौं
ऐल्हौं त॑ बस —-
नथ, बुलाक आरू पैजनिया ।

सूरज अस्त होय क॑ गंगा घाट पहुँचलऽ छै
तारा सब  देखऽ सोझे अँगना सोझियैलऽ छै
ढघरऽ पर खाली सगरे सन्नाटा छितरैलऽ छै
सजनी जे मिलल॑ राहऽ म॑ मन भरमैलऽ छै
तोरऽ  बात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ धात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  रीत समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  गीत समझ नै ऐल्हौं
ऐल्हौं त॑ बस —-
नथ, बुलाक आरू पैजनिया ।

सरदी केरऽ नील गगन प॑ कोहरा  कोहरैलऽ छै
रौद  कहीं दूर पहाड़  के पीछू सीधियैलऽ छै
आगिन के गरमी स॑ ही हर पल नितरैलऽ छै
सजनी जे मिलल॑ राहऽ म॑ मन भरमैलऽ छै
तोरऽ  बात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ धात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  रीत समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  गीत समझ नै ऐल्हौं
ऐल्हौं त॑ बस —-
नथ,बुलाक आरू पैजनिया ।

बागऽ  क॑ फूल प॑  देखऽ भौंरा  मँडरैलऽ छै
फूलऽ के वास सगर हवां  छिरियैलऽ छै
कोयल के कूहू कूहू स॑ कन कन मतियैलऽ छै
सजनी जे मिलल॑ राहऽ म॑ मन भरमैलऽ छै
तोरऽ  बात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ धात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  रीत समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  गीत समझ नै ऐल्हौं
ऐल्हौं त॑ बस —-
नथ, बुलाक आरू पैजनिया ।

सघन करियऽ घटा  दलमल उमतैलऽ छै
व्योम विस्तृत भाल बेवजह हदियैलऽ छै
जगह जगह झरना  झर झर झरझरैलऽ छै
सजनी जे मिलल॑ राहऽ म॑ मन भरमैलऽ छै
तोरऽ  बात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ धात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  रीत समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  गीत समझ नै ऐल्हौं
ऐल्हौं त॑ बस —-
नथ, बुलाक आरू पैजनिया ।

छुमछुम छनन  छन बाजै  तोरऽ पाँव पैजनिया
चरम उत्कर्ष छटा बाँधै बुलाक आरू नथनिया
संगीत -छटा के संगम स॑ हीं जीवन उपलैलऽ छै
सजनी जे मिलल॑ राहऽ म॑ मन भरमैलऽ छै
तोरऽ  बात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ धात समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  रीत समझ नै ऐल्हौं
तोरऽ  गीत समझ नै ऐल्हौं
ऐल्हौं त॑ बस —-
नथ, बुलाक आरू पैजनिया ।

Angika Poetry : Nath Bulak Aaroo Paijania
Poetry from Angika Poetry Book : Sarang
Poet : Kundan Amitabh