नवका साल के स्वागत म॑ | अंगिका कविता | कैलाश झा ‘किंकर’

नवका साल के स्वागत म॑
अंगिका गीत | कैलाश झा ‘किंकर’

नवका साल के स्वागत म॑ ।
अंग-अंगिका भारत म॑।।

उमगित छै टोला-टप्पर,
गाँव-शहर मारै दरबर।
पिकनिक-सिकनिक मनबै ल॑ –
जोश भरल अभ्यागत म॑।

माय कताने’ धाम चलऽ
छोड़ो दोसर काम चलऽ
कविसम्मेलन साले-साल-
नवका साल के स्वागत म॑ ।

जहाँ सिद्ध कविगण आबै
शान्ति ,सुयश,सदगुण पाबै
गीत,गजल,कविता संगें
उमगित प्राण अनागत म॑ ।

सुखद कामना बरसै छै
शब्द-साधना हरषै छै
खूब बृद्धि भेलै सगरो
कलम-कलम के ताकत म॑ ।