रूप निहारै ऐना मं॑ | अंगिका कविता | भूदेव प्रसाद शर्मा ‘ भूषण ‘

रूप निहारै ऐना मं॑

— भूदेव प्रसाद शर्मा ‘ भूषण ‘ —

ऐना रंग चान चमकै छै अँगना मं॑ ।
सजलऽ रूप रंग चान सन मुख दमकै छै घोंघा मं॑,
छिटकै दुघिया बदन सं॑ झकझक इंजोरिया साजन आबै सपना मं॑,
लऽ औंगरी रऽ लाल लाल हाथऽ मं॑ मेंहदी रऽ निखार,
कसमस बदन पर कुचुकी उभार,
रूप निहारै नवोढ़ी रही ।

Angika Poetry :Roop Nihare Aiyana Mein Doori
Poet : Bhoodev Prasad Sharma Bhushan