मानसून के बारिश | अंगिका कविता | रंजना सिंह “अंगवाणी बीहट ” | Mansoon Ke Barish | Angika Geet | Ranjana Singh Angvani Bihat

मानसून के बारिश
अंगिका गीत | रंजना सिंह “अंगवाणी बीहट “

देखहो नी सखी! अइले रिमझिम फुहार।
मन नञ लागै छै , कतौ अँगना द्वार ।

परदेशी पियबा होलै, बचबा छै बीमार ।
गिरे छै छप्पर आरू ,बेघर होलै परिवार।।

दाना पानी खोजे छै, चुनमुनिया हमार।
पिया परदेश छै, फूटलै हमर्हो कपार।।

झूमी-झूमी दिन-राति, गाबै छै पूर्वा बयार।
महकै छै बाग-बगिया, पुष्पों स’ गुलजार।।

दादुर चमकै छै ,असकल्ले जियरा डराय।
झींगुर,मेंढक गीत छेड़े छै, सुर लगाय।।

रंजना सिंह अंगवाणी बीहट
Angika Poetry – Mansoon Ke Barish | मानसून के बारिश
Poet – Ranjana Singh | रंजना सिंह “अंगवाणी बीहट “