दुलरिया | अंगिका कविता | सुधीर कुमार प्रोग्रामर | Dularia | Angika Poetry | Sudhir Kumar Programmar

दुलरिया 

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

गरजी गरजी बरसे करका बदरबा जे
कोनी ठीहां माचिया विछाबौ गे दुलरिया
झरिये में भींगी गेलै गेनरा भोथरबा जे
भींगी गेले अचरा के कोर गे दुलरिया ।
भींगी भींगी सुख्खी गेलौ छतिया के दूधबा जे
सुख्खी गेलौ आँखी केरो लोर गे दुलरिया
चाटी-चाटी लाल भेलौ हांथो के अंगुठबा से
लाले-लाले सुगनी के ठोर गे दुलरिया।
अरजै लै बाबू गेलौ, टकबा के ढेरिया जे
वहीं जाय के सुतलौं निभोंर गे दुलरिया
जागी-जागी सुती गेलौ मनो के सपनमां जे
सुती गेलै जिनगी के भोर गे दुलरिया।

Angika Poetry : Dularia

Poet : Sudhir Kumar Programmar