पुलवामा आतंकी हमला | अंगिका कविता | भोला कुमार “बागवानी”

पुलवामा आतंकी हमला
अंगिका कविता | भोला कुमार “बागवानी”

“की बितलै ?”
ऊ परिवारौ प की बितलै ?
देशौ लेली जे नञ झुकलै।
मातृभूमि लेली जे नञ रुकलै,
बियालीस जबानौ के प्राण छुटलै ।
ऊ परिवारौ प की बितलै ।।

लिपटी-लिपटी कनिञान कानै,
पहाड़ टुटलै सब नँ जाँनै ।
एक्के बार चेहरा देखै द,
खूब्बे प्यार हमरा करै द ।
मनाय बाला कैहनै सुतलै,
नञ जानलकै परिवारौ प की बितलै ।।

खनकै छेलै चूड़ी केनाँ फुटलै,
श्रृंगार छेलै सिंदूर केनाँ पोछबै ।
काँनतें-काँनतें गल्लऽ सुखलै,
नींद छै कहाँ आँख फूल्लै ।
बात्है-बातौ मँ दाँती लागलै,
नञ जानलकै परिवारौ प की बितलै ।।

फूल मुरझैलौ गाछो होलै उदास,
नदी सुखलै काँनै छै आकाश ।
भाय-भोकरै गैय्या -भोकरै,
बहिन -काँनै आँसू के पोछतै ?
भगवानो ई देखी क काँनलै,
ऊ परिवारौ प की बितलै ।।

Angika Poetry – Pulwama Aatanki Hamla | पुलवामा आतंकी हमला
Poet – Bhola Kumar ‘Baghbani’ | भोला कुमार ‘बागवानी’

– कवि परिचय –
नाम- भोला कुमार “बागवानी ”
पेशा-माध्यमिक शिक्षक
कार्यरत-उत्क्रमित उच्च विद्यालय पैरगाहा झाझा, जमुई(बिहार)
जन्म- पन्द्रह अगस्त 1988
जन्मस्थान-नया टोला चौहद्दी, नाथनगर, भागलपुर (बिहार)
शिक्षा- एम. ए. (मध्यकालीन इतिहास)
ति. माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर (बिहार)
बी. एड. ग्वालियर, जीवाजी,वि वि मध्य प्रदेश

प्रकाशित किताब

1) मेरी साध (हिंदी -कविता संग्रह)
2)अंग- धरती(अंगिका-कविता संग्रह)
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