अंग जल -१| अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -१

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

कहै दादा सॅ इक पोता, कि बाबू याद आबै छै
कहींने नें हमर मैया, अबेॅ सिन्दूर लगाबै छै।

जों गहलै छै कभी कौवा, तेॅ ढेला फेंकी केॅ मैया
अहो बोलोॅ न हो दादा, तुरत कहिनें भगाबै छै।

खनाखन हाँथ मेॅ चूड़ी, बजै छै रोज काकी केॅ
हमर मैया के हांथों मेॅ, अहो मठिया पिन्हाबै छै।

पुजै छै तीज, करवाँ-चौथ ई टोला मुहल्ला केॅ
मगर मैया सॅ पूछै छी तेॅ कानी कॅ कनाबै छै।

बथानी भैंस नै बकरी, न कोनोॅ गाय किल्ला मेॅ
मगर कींनी केॅ पाथा-भर दही कहिनें जमाबै छै।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल