अंग जल -८ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -८

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

बदरा रे!.. अँगना मे आबें तॅ जानौं
हुनको संदेषा सुनाबे तॅ जानौं।

पिया दूर परदेष गेलै तॅ गेलै
हमरो दरद मॅ समाबें तॅ जानौं।

विजली जों छिटकै नजर चांधियाबै
नसीबोॅ के बिजली जलाबें तॅ जानौं।

गरीबोॅ पे ठनका गिराबै छैं कहिनें
गरीबी पे ठनका गिराबें तॅ जानौं।

यहाँ बेग, झिंगुर तॅ गैबे करै छै
नागिन सेॅ सोहर गबाबोॅ तॅ जानौं।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल