अंग जल -५| अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -५

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

फागुन के खुमारी में, तन-मन अजबारी छै
सालोॅ के मचानी पर, चैती केरोॅ पारी छै।

मेहनत के फसल धरलोॅ, खेतॉे सॅे खम्हारी पर
गदरैलॉे खेसारी के, छीमरी सुकुमारी छै।

पैना की अखेना की, दौनी से ओसौनी की
खटरूस टिकोला संग, सतुआ मनोहारी छै।

गाछोॅ के फुलंगी पर, कोयल केरो किलकारी
उमतैलोॅ जे पछिया के, बहसल सिसकारी छै।

अचरा मे लपेटी के, कोठी में समेटी के
पहुना के पसीना से, गद्गद चिलकारी छै।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल