अंग जल -४ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -४

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

नीन उचटी गेलै भियान होतै कहिया
रोटी पे हमरा तियोन होतै कहिया।

खिस्से मॅ हिस्सा हजोम करी गेल्हॅे
माफ हमरो कर्जा-वियान होतै कहिया।

साढ़ु मॅ सटपट, सहोदर लॅ छटपट
हमरा पॅ तोरो धियान होतै कहिया।

थैली मॅ नीयम अटैची मॅ कानून
समझै के हुनका गियान होतै कहिया।

राईफल के बीचॉे मॅ झंडा तिरंगा
आढ़सठ तॅ बीतलै निदान होतै कहिया।

तोरोॅ घर के बूतरू तॅ बापोॅ के बाबा
हमरो घर के दादा सियान होतै कहिया।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल