अंग जल -३० | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -३०

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

अनटेटलोॅ सन बात बसाहा बोलै छै
सब केॅ आपनेॅ जात बसाहा बोलै छै।

जजमानोॅ के पत्ता मेॅ लड्डू पेड़ा
पंड़ित जी केॅ भात बसाहा बोलै छै।

उखड़ी मेॅ मुड़ी देलकै जेॅ जानी केॅ
लाजेंॅ बोलै झात बसाहा बोलै छै।

सोना केॅ मंदिर मेॅ पूजा के खातिर
लोभी जुटलै सात बसाहा बोलै छै।

बाघ के साथेॅ बकरी के कुस्ती होतै
देखिहोॅ नौमी रात बसाहा बोलै छै।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल