अंग जल -३| अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -३

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

हवा मॅे हवाई हो कबतक उड़ैभो
लगै छै बचलका खजाना बुड़ैभो।

अजादी के सुखबा तेॅ तोहीं हसोतल्हें
कहीया गुलामी सेॅ हमरा छोड़ैभो।

बड़ोॅ घर मॅे दूधोॅ सेॅ कुल्ला करै छै
बुतरूआ ई फुल्ला कॅे कहिया जुड़ैभो।

तोरा घर मेॅ सुख आरो सुख के सुखौतोॅ
जरूरत छै अखनी तेॅ कहिया पुरैभो।

सबासिन छै रूसलोॅ जे असरा हियाबै
बताबों न साहब कि कहिया घुरैभो।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल