अंग जल -२९ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -२९

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

घोंसला जोॅ बनाबै तेॅ औवल लगै
जब चिड़ैया जगाबै तेॅ औवल लगै।

सोहदा केॅ जे दै मसबरा ओकरे
लोटिया जब डुबाबै तेॅ औवल लगै।

रोज चाही मसाला जे अखबार केॅ
जों बिहैली गोसाबै तेॅ औवल लगै।

सब खबर बे-असर, बर्फ के ढेर पर
जों खबर केॅ धिपाबै तेॅ औवल लगै।

चोर के दागला सेॅ कहाँ फायदा
जों सिपाही दगाबै तेॅ औवल लगै।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल