अंग जल -२७ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -२७

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

सत्तू मेॅ सत्तू मिलैभेॅ हो मीता
खैभे कि हमरा खिलैभेॅ हो मीता।

हम्में सुदामा तोंय किषन कन्हैया
मारभेॅ कि हमरा जिलैभेॅ हो मीता।

आफत बताबै अघोरी के चुट्टा
लागै छै पानी पिलैभे हो मीता।

नफरत के गाछ यहा हल-हल करै छै
धरती सेॅ जड़ केॅ हिलैभेॅ हो मीता।

झपटै छै, भुक्कै छै सोना कटाहा
कुत्तेॅ संॅ ओकरा लिलैभे हो मीता।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल