अंग जल -२२ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -२२

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

हाकिम के बोली-चाली मेॅ छाली छै
हुनको काजू किसमिस भरलॉे थाली छै।

दुनिया के ठोरोॅ पर पपड़ी छै लेकिन
हुनको ठोरोॅ पर देखोॅ तेॅ लाली छै।

ननदोसी के साथें चलली नयकी तेॅ
रस्ता-पैरा बाजै कत्ते ताली छै।

मोका देखी के गोबर थपियाबोॅ नी
देखोॅ तेॅ बगलोॅ मेॅ गहिड़ो नाली छै।

हुनको बूतरू छेना चोभै गारी केॅ
हमरोॅ बुतरू कॅे मुॅह मेॅ की जाली छै।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल