अंग जल -२० | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -२०

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

जन्मलै खेत मेॅ अर मरै खेत मेॅ
काम रौदा-बताषे करै खेत मेॅ।

खूब कैता, करेली लधै झींगली
जब किसानोॅ के लेहू जरै खेत मेॅ।

जों किसानों के खुरपी हँसै जोर से
ते पपीता, कदीमा फरै खेत मेॅ।

घास-भूसा सरंग से नै आबै कभी
सब जनाबर मगँन से चरै खेत मेॅ।

रात झरिया पड़ै कि अन्धरिया रहै
दीप जुगनू के रोजे बरै खेत मेॅ।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल