अंग जल -१८ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -१८

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

कलम के पुजारी माँगे मैया तेरे द्वार में
षुभ सामाचार मिलै रोजेॅ अखबार में।

रीन से उरीन रहै, देष के सपनमां
सुख के फुहार मैया बरसे बिहार में।

खेत खलिहान गेहूँ-धान महकौवा
हरा-भरा गाँव-टोला रहे गुलजार में।

स्कूल पे स्कूल बने, महला दूमहला
किनारा लगीच लागै, छेलै मँझधार में।

मोटे-मोटे छिमरी के दाल गदरौवा
साईकिल पे चिड़िया नाँकी बिटिया कतार मेॅं

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल