अंग जल -१५ | अंगिका गजल | सुधीर कुमार प्रोग्रामर

अंग जल

गजल -१५

— सुधीर कुमार प्रोग्रामर —

चिठ्ठी पठाबै डाक सेॅ मजमून के बगैर
जैसैं दही-बड़ा मिलै छै नून के बगैर।

हाकिम बिहाने धूप मेॅ बैंठलोॅ उदास छै
चहकी केॅ टोकैॅ चिड़ियाँ कानून के बगैर।

बी.पी. बढलका टन्न सेॅ मरलै धनाट जे
जीये वहाँ पड़ोस में कुछ खून के बगैर।

गाली मेॅ जानबर केॅ सब दिन बुरा-भला
लेकिन कहाँ छै आदमी नाखून के बगैर।

खेतोॅ मेॅ मचानी पर सुनसान जों रहै
गाबै उदास मोन भी गम, धून के बगैर।

Angika Poetry / Gazal : Ang Jal / अंग जल

Poet : Sudhir Kumar Programmar / सुधीर कुमार प्रोग्रामर

Angika Gazal Collection / अंगिका गजल संग्रह – अंग जल