केखरौ कुटिया केखरौ झोर| अंगिका कहावत

  केखरौ कुटिया केखरौ झोर केखरौ आँखी स॑ टपकै लोर

अर्थ –  किसी वस्तु का पक्षपातपूर्ण वितरण ।

किसी को मछली की कुटिया मिली, किसी को केवल झोर (रस) ही मिला और किसी को तो वह भी नहीं मिला । फलस्वरूप, उसकी आँखों से आँसू बह रहे हैं ।