शीत बसंत | Sheet Basant | Angika Lok Katha | कुंदन अमिताभ | Kundan Amitabh

शीत वसंत की लोककथा बिहार के अंग क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है। यह एक प्रेमप्रधान लोककथा है। इस लोककथा में जहाँ विमाता के दुर्व्यवहार की बात आती है वहीं भाई-भाई का प्रेम भी चरम सीमा पर पहुँचता दिखाई पड़ता है । कहानी में एक ऐसी जादूई चिड़िया होती है, जिसके दिल को खाने वाला इंसान एक न एक दिन राजा बन जाता है । इस लोककथा को मुख्य रूप से नाच के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है । एक खिस्सा के रूप में शीत-बसंत समूचे दक्षिण एशिया में प्रचलित है । पंजाब से असम और कश्मीर से कन्याकुमारी तक इसके दर्जनों संस्करण देखने को मिलते हैं ।

एक राजा और रानी के दो बेटे हैं – शीत और बसंत । राजा-रानी दोनों राजकुमारों शीत और बसंत को काफी प्यार करते हैं । किन्हीं कारणों से रानी की असामयिक मृत्यु हो जाती है । रानी की मृत्यु के पश्चात राजा को अपने राजकुमार बेटों के समुचित लालन-पालन की चिंता सताने लगती है । राजा इस आशा में कि उनके राजकुमारों को पुनः माँ का प्यार मिल सके, पुनर्विवाह कर राजमहल में एक नई रानी ले आता है । जबकि नई रानी का इरादा यह होता है कि उनका खुद का जन्मा बच्चा राजा के सिंहासन का वारिस बने ।

जवान और खूबसूरत होने के नाते, नई रानी उम्रदराज राजा को सम्मोहित कर उसके दिल पर पूरी तरह से कब्जा कर लेती है । शीघ्र ही वह तरह-तरह के बहाने बनाकर अपने सौतेले बेटों के खिलाफ साजिश कर भड़काने के ख्याल से राजा से शिकायत करती रहती है । परिणामस्वरूप दोनों राजकुमार को खुद मरने के लिए जंगल में छोड़ दिया जाता है।

जंगल में, वे एक पेड़ के नीचे रात बिताते हैं। शीत जब सोया रहता है और बसंत उसकी देखभाल व निगरानी कर रहा होता है तो वह ऊपर पेड़ की शाखाओं पर बैठै आपस में बात कर रहे दो जादूई पक्षियों के वार्तालाप को सुनता है । दोनों चिड़ियाँ परिवेश में किसी व्यक्ति की उपस्थिति से अनजान एक-दूसरे से बातें कर रहे थे कि जो कोई उनके मांस खाएगा वह राजा बन जाएगा । बसंत अपने तीरों से दोनों पक्षियों को मारता है और सुबह में,शीत को खिला देता है । शीत इस तथ्य से अनजान रहता है कि उसे जो मांस खिलाया जा रहा है उसे खानेवाला एक न एक दिन किसी राज्य का राजा बनेगा । बसंत स्वयं दूसरे पक्षी को खाता  है जिसका मांस उसे  भविष्य में  कुछ अलग तरह के फायदे लाने की संभावना रखता था ।

दिन के दौरान, दोनों अपने खाने-पीने के प्रावधानों की तलाश में जंगल में एक-दूसरे से भटक जाते हैं । शीत भटककर पास के दूसरे राज्य के किसी शहर में पहुंच जाता है । जहाँ शीत के गले में अपने भावी राजा के रूप में शाही हाथी द्वारा माला डाला जाता है, क्योंकि  उस राज्य के पुराने राजा की मृत्यु हो चुकी होती है ।

सभी मौखिक कथाएं इस बात से सहमत हैं कि शीत के साथ फिर कोई अनहोनी नहीं घटती है और वह उसी राज्य का राजा बनकर राज करता रहता है और अंततः उसकी मुलाकात बसंत से होती है ।

बसंत को अपने जीवन में इस बीच कई रोमांचकारी घटनाक्रम से गुजरना पड़ता है । कहानी के एक संस्करण में यह कहा गया है कि वह एक साँप के काटने से मर जाता है । पर माता पार्वती के आग्रह के पश्चात शिवजी उसे नई जिंदगी प्रदान करते हैं । उसका सामना एक बाघ तथा राक्षस से होता है जिसे वह मौत के घाट उतार देता है ।

एक समय बसंत  नीच सोचवाले एक व्यापारी के चंगुल में फँस जाता है । उस व्यापारी का जहाज किनारे गाद में फँसा होता है । व्यापारी योजना बनाकर रखा होता है कि बसंत की बलि देने से जहाज फिर से मुख्य धारा में वापस पहुँच पाएगा । पर इस बलि की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि बसंत के एक स्पर्श मात्र से जहाज गाद से आजाद हो जाता है ।

प्रायः सभी कहानियों का मानना है कि बसंत की वीरता के किस्से  काफी प्रचलित हो गए थे । अपनी वीरता के बदौलत बसंत ने  एक राजकुमारी के दिल को जीत कर अपनी दुल्हन के रूप में  हासिल किया । फिर एक धूर्त व्यापारी ने, जिसका हुकूमत राजकुमारी पर चलता था , राजकुमारी द्वारा बसंत को  जान से मारने  के लिए बीच समुंदर में ही फेंकवा दिया । लेकिन राजकुमारी चुपके से बसंत को बचाने में कामयाब हो जाती है ।

व्यापारी का पोत बहते हुए राजा शीत के राज्य पहुँच जाता है । बाध्य किए जाने पर बसंत अपने कारनामों की दास्तान राजा शीत को बताने लगता है । इसी क्रम में शीत और बसंत दो बिछड़े हुए राजकुमार भाईयों का खुशनुमा पुनर्मिलन होता है ।

कुंदन अमिताभ द्वारा लिखी गई ‘शीत-बसंत’ पुस्तक  में अंग देश में प्रचलित शीत बसंत के खिस्से को विस्तार से पढ़ा जा सकता है ।