सफर | अंगिका कहानी | Angika Story

सफर | अंगिका कहानी | कुंदन अमिताभ
Safar | Angika Story | Kundan Amitabh

वू मई महीना केरऽ अंतिम सप्ताह छेलै । सुशांत क॑ अचानक ही काम केरऽ सिलसिला म॑ मुंबई स॑ दिल्ली जाय केरऽ प्रोग्राम बनाय ल॑ पड़ी गेलै । ऐना त॑ वू फ्लाईट स॑ जाब॑ सकै छेलै । लेकिन चूँकि दिल्ली म॑ अगला दिन दोपहर म॑ मीटिंग छेलै, ई लेली  राजधानी स॑ ही जाना उचित समझलकै । साँझ क॑ चली क॑ रात भर केरऽ सफर तय करी क॑ भोरे-भोर दिल्ली पहुँची क॑ फ्रेश होय क॑ मेट्रो स॑ द्वारका मीटिंग अटैंड करै ल॑ पहुँची जाना रहै । जहाँ कोनो जल्दबाजी नै हुअ॑ वहाँ हवाई जहाज केरऽ मँहगा टिकट खरीदी क॑ सफर करला के बजाय ट्रेन स॑ सफर करना ओकरा हमेशा ही अच्छा लगै छै । राजधानी केरऽ वातानुकूलित बोगी म॑ रात केरऽ नींद भी पूरा कर॑ म॑ कोय बाधा नै होय छै। जहाँ दू टका स॑ काम चल॑ पार॑ छै त॑ वहाँ दस टका खर्च करला स॑ की फायदा ?

स्टेशन लेली घऽर स॑ निकलै घड़ियाँ ओकरऽ कनिआञ न॑ याद दिलैलकै, “ट्रेन म॑ बैठी क॑ फोन करी दिहऽ ।”  “जरूर” कही क॑ सुशांत लिफ्ट दन्न॑ बढ़ी गेलऽ छेलै । जब तलक नीचें उतरलै, ड्राइवर न॑ समान कार म॑ रखी देन॑ छेलै । स्टेशन लेली निकलै म॑ कुछू देर नै होलै । एक-सवा घंटा केरऽ रस्ता तय करी क॑ सी.एस.टी. रेलवे स्टेशन पहुँची गेलऽ रहै । ‘‘समान बर्थ के नीचें लगाय दहो’’ सुशांत न॑ पानी केरऽ बोतल क॑ खिड़की के पास लगलऽ ऑयरन हुक स॑ लटकैत॑ हुअ॑ ड्राइवर स॑ कहलकै ।

ट्रेन खुलै म॑ अभी भी लगभग आधा घंटा छेलै । ड्राइवर समान धरी क॑ चल्लऽ गेलऽ छेलै । सुशांत लेली साइड वाला निचलका आरक्षित बर्थ प॑ एगो जनानी आरू मर्दाना पहिनै स॑ बैठलऽ छेलै । आपस म॑ गपियाय रहलऽ छेलै । सुशांत एक बार सोचलकै कि कहिय्यै कि वू दूनू अपनऽ बर्थ प॑ चल्लऽ जाय । फेरू ई सोची क॑ वू रूकी गेलै कि एक बार ट्रेन चालू होय जाय त॑ वें सब अपनऽ-अपनऽ जग्घऽ खुद्दे पकड़ी लेतै ।

तब तलुक सामने वाला सीट प॑ जग्घऽ बनाय क॑ बैठी रहलै । तनी देर बाद सुशांत केरऽ  मऽन फेरू स॑ अपनऽ आरक्षित बर्थ प॑ बैठलऽ महिला दन्न॑ देखै के होलै । ओकरा अंदाजा छेलै कि सामने वाला सीट प॑ दिक्कत स॑ बैठत॑ देखी क॑ दूनू जन ओकरऽ आरक्षित बर्थ छोड़ी क॑ अपनऽ सीट पकड़ी लेतै । राजधानी एक्सप्रेस म॑ चलै वाला यात्री एतना त॑ शिष्टाचार बरतथैं छै कि दोसरा के आऱक्षित जग्घऽ प॑ जाय क॑ नै बैठै छै । जों बैठै भी छै त॑   जेकरऽ सीट छेकै ओकरा स॑ जरूर आग्रह करै छै कि वू भी बैठी जाय । सुशांत न॑ सोझे नै देखी क॑ सामने वाला दीवार प॑ लगलऽ आयना म॑ देखलकै जहाँ साफ-साफ लौकी रहलऽ छेलै कि दूनू जन आपस म॑ बात करै म॑ कोन हद तक व्यस्त छेलै । ऐन्हऽ बुझैलै जेना वू दूनू क॑ कोय फिकिर नै कि वू दोसरा के सीट प॑ बैठलऽ छै ।

सुशांत  कखनू कनखी स॑ सोझे त॑ कखनू सामने लगलऽ आयना स॑ लगातार वू दूनू क॑ अचरज स॑ निहारै म॑ लगलऽ छेलै । महिला केरऽ सुंदरता मध्यम स्तर के छेलै । लगभग पैंतीस-चालीस साल के त॑ जरूर होतै । जौरें बैठलऽ मरदाना उल्टा ओकरा स॑ तनी कम उमर के लेकिन हट्टा-कट्ठा नजर आबी रहलऽ छेलै । महिला अपनऽ आसपास के वातावरण स॑ बेखबर बात करै म॑ व्यस्त छेलै । पूरे बर्थ पर अलग-अलग तरह के तीन-चार ठो बैग आरू कोच अटेंडेंट द्वारा देलऽ दू गो लोकल अखबार केरऽ प्रति परलऽ छेलै । महिला एगो पत्रिका खोली क॑ ओकरऽ पन्ना के उपर मोबाईल रखी क॑ ओकरऽ बटन दबाय क॑ लगातार कुछ मैसेज लिखै म॑ व्यस्त रहै । साथें बैठलऽ मरदाना स॑ आय कॉन्टैक्ट बीच-बीच म॑ लगातार बनैल॑ रखी रहलऽ छेलै ।

दूनू के बातचीत करै के अंदाज आरू भाव-भंगिमा स॑ एतना त॑ साफ छेलै कि दूनू पति-पत्नी नै छेलै । हाँ, वैन्हऽ बनै के नाटक करी रहलऽ छेलै । सुशांत सोचलकै कि ई सब बातऽ स॑ ओकरा की लेना-देना । ई त॑ महिला यात्री होय के चलतें सामने वाला क॑ एडजस्ट होय के समय द॑ रहलऽ छेलै ।  बीच-बीच म॑ आमने-सामने केरऽ बर्थ प॑ बैठलऽ सह यात्री सिनी स॑ बातचीत करी क॑ वू ई अंदाज लगाबै के कोशिश करी रहलऽ छेलै कि आखिर ओकरऽ सीटऽ प॑ जमलऽ दूनू जनऽ के कोन बर्थ होतै ।

तनी देर आरू बितलै । घमैलऽ बदन एसी केरऽ ठंडक पाबी क॑ सामान्य होय गेलऽ छेलै । लगलै अब॑ अपनऽ सीटऽ प॑ जाय क॑ सुस्ताना चाहियऽ । ई बीच वू कंपार्टमेंट म॑ एगो आरू आरक्षित सवारी आबी गेलऽ छेलै ।  कुली न॑ समान सीटऽ के नीचें राखै लेली सुशांत क॑ उठाय देन॑ छेलै । उठथैं सुशांत न॑ एक बार फेरू अपनऽ बर्थ दन्न॑ वू लोगऽ क॑ उचटलऽ नजर स॑ देखलकै । दूनू एगो पत्रिका केरऽ पन्ना पलटै  म॑ व्यस्त छेलै ।  अब॑  हर हालत म॑ अपनऽ सीट पकड़ना छेलै ओकरा ।

जब॑ वू अपनऽ बर्थ दन्न॑ बढ़ै प॑ छेलै , तभिये वू जनानी सथ॑ बैठलऽ मरऽद उठी क॑ वॉशरूम दन्न॑ बढ़ी गेलऽ रहै । सुशांत अब॑  महिला से संवाद स्थापित करी रहलऽ छेलै ।  महिला स॑ संवाद करै के उद्देश्य स॑ ओंय शालीनता स॑ पूछलकै, ‘‘ऐक्सक्यूज मी मैडम, आपन॑ अपनऽ सीट प॑ चल्लऽ जैईयै ?’’ महिला न॑  सपाट नजर स॑ सुशांत क॑ देखलकै ।  ऊंच्चऽ कद-काठी केरऽ व्यक्ति, गोरऽ रंग आरू उन्नत ललाट , कुल मिलायक॑ आकार-प्रकार स॑ संभ्रांत, सुशिक्षित पर स्वभाव म॑ तनी टा सकुचाहट रखै वाला आदमी । महिला न॑ बिना कुछ बोललें फेरू नजर नीचें करी लेलकै ।

महिला केरऽ ऐसनऽ आचरण स॑ सुशांत के अचरज तनी टा आरू बढ़ी गेलऽ छेलै । दरअसल ट्रेन कंपार्टमेंट म॑ घुसला के लगभग आधा घंटा बाद भी अपनऽ आरक्षित बर्थ पर बैठै के कोशिश म॑ हुनी पैलकै कि उक्त महिला न॑ ओकरऽ बात क॑ जानी-बुझी क॑ अनसुना करी देल॑ छेलै । सुशांत द्वारा महिला स॑ हटै लेली दुबारा आग्रह करला प॑  कि हुनी त॑ ओकरऽ बर्थ पर बैठलऽ छै । महिला न॑ ई तथ्य स॑ अनजान रहै के नाटक करत॑ हुअ॑ जबाब देलकै, ” ई त॑  हमरऽ बर्थ छेकै ।”  जब॑ सुशांत न॑ सख्ती स॑ कहलकै, “मैडम, ई बी-१० कोच छेकै आरू ई कोच केरऽ ई बर्थ के टिकट हमरे नाम स॑ कंफर्मड् छै, ऐसनऽ हुऐ नै सकै छै कि रेलवे द्वारा एक्के बर्थ पर दू जनऽ के टिकट कंफर्मड् करी देलऽ गेलऽ हुअ॑ । ”

सुशांत अचानक स॑ सख्त होय गेलऽ छेलै । बहुत बार लोगऽ के नम्र व संभ्रात व्यवहार क॑ ओकरऽ कमजोरी समझलऽ जाय छै आरू दोसरें ओकरऽ नाजायज फायदा उठाबै के कोशिश करै छै । सुशांत क॑ लगलै ओकरा सथं॑ ऐसने होय रहलऽ छै । ई लेली अचानक स॑ ओंय सख्त रूख अपनाय लेल॑ छेलै । सुशांत केरऽ विनम्र आग्रह क॑ सख्तता म॑ बदलतें देखी क॑ महिला न॑ आग्रह के लहजा म॑ ओकरा स॑ बात कह॑ लागलै । कह॑ लागलै, “हम्म॑ दूनू एक्के सथें यात्रा करी रहलऽ छियै, पर एगो टिकट ई कोच म॑ आरू दोसरऽ बी-२ कोच म॑, पर कुली न॑ गलती स॑ दूनो के समान यह॑ बोगी म॑ रखी देलकै । की आपन॑ बी-२ कोच के बर्थ पर चल्लऽ जैबै ? ”

एक क्षण लेली त॑ ओकरा वू महिला यात्री प॑ ई बात लेली गुस्सा आबी रहलऽ छेलै कि जानी बूझी क॑ दोसरा के बर्थ प॑ बैठी क॑ वें फेरू ओकरा गलत कैन्हें बोली रहलऽ छेलै कि ओकरा पता नै छै । सुशांत क॑ ओकरा प॑ गुस्सा  ई लेली भी आबी रहलऽ छेलै कि ओकरऽ सीट प॑ बैठी क॑ ओकरे उपर रौब जमाबै के कोशिश म॑ लगलऽ छेलै । औपचारिकता के नाते भी ओकरा लेली सीट छोड़ी क॑ हटै के बजाय अपनऽ पुरूष मित्र के साथ ओकरे सीट प॑ बैठी क॑ बात करलें जाय रहलऽ छेलै । सुशांत  अपनऽ आरक्षित बर्थ प॑ अपनऽ लेली बैठै के जग्घऽ बनाय करी केन्हौं क॑ बैठी गेलऽ छेलै ।

एगो महिला केरऽ सहुलियत क॑ ध्यान म॑ रखी क॑ अभी तलक सीट बदलै लेली वें सामंजस्य बैठाबै ल॑ जे विचार करी रहलऽ छेलै, अचानक स॑ महिला केरऽ चंट व्यवहार न॑ ओकरा म॑ बदलाव लानी देल॑ रहै । सुशांत बोललै, ” भई अगर हमरा दोसरो कोच म॑ जाना भी होतै त॑ टी.टी.ई. स॑ अपनऽ टिकट चेक करैल॑ बगैर नै जैबै ।” मुंबई आरू पूरे जीवन केरऽ रेलसफर म॑ ई तरह के दृश्य पहलऽ बार नै खाली देखी रहलऽ छेलै बल्कि ओकरऽ सामना भी करी रहलऽ छेलै । ई अप्रत्याशित त॑ छेलबे करलै अचंभा भी पैदा करी रहलऽ छेलै । अंदर स॑ ई महिला ओकरा कुछ सामान्य त॑ नै लगलै । एगो आदमी के हृदय म॑ महिला लेली सॉफ्ट कॉर्नर रहै के वू महिला फायदा उठाय ल॑ चाही रहलऽ छेलै ।

हुन्न॑ मुंबई राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन दिल्ली रवाना होय लेली मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन केरऽ प्लेटफॉर्म पर सरकना प्रारंभ करी चुकलऽ रहै । रेंगना शुरू करथै गाड़ी स्टेशन, शहर पीछू छोड़तें आगू बढ़लऽ जाय रहलऽ छेलै ।  हिन्न॑ सुशांत केरऽ मनऽ म॑ तरह-तरह के भावना व उत्सुकता उद्वेलित हुअ॑ लगलऽ छेलै । पत्नी क॑ फोन करै के बजाय सथ॑ बैठलऽ महिला स॑ पूछ॑ लागलै, “आपन॑ क॑ कहाँ तलक जाना छै ?” महिला दन्न॑ स॑ कोय जबाब नै पाबी क॑ वें अगला सवाल करलकै, “जे बर्थ अदला-बदली करना छै ओकरऽ कोच नंबर आरू बर्थ नंबर की छेकै ? “

जबाब दै के जग्घऽ प॑ साथ बैठलऽ महिला सहयात्री, अप्रत्याशित रूप स॑ सुशांत प॑ जोर-जोर स॑ चिल्लाब॑ आरू गलियाबै लगलऽ छेलै । बोल॑ लागलै, “ हमरा नै बैठना ई मनहूस के सामने । हमरा स॑ टी. टी. ई. आरू पुलिस ऐसनऽ बात करै छै आरू पूछै कि कहाँ जाना छै, कोन बर्थ छेकै हमरऽ ।” चिकरी-चिकरी क॑ बोल॑ लागलै, ” चोर लोग ही  एना पूछै छै। हम्म॑ त॑ करोड़ों म॑ कमाबै छियै, चोर कहाँकरऽ, भिखमँगा कहाँकरऽ । ” फेरू कोच अटेंडेंट क॑ सामान ढोय लेली पुकारतें खुद अपनऽ समान उठाय-पुठाय क॑ बी-२ कोच दन्न॑ रवाना होय गेलऽ छेलै । अटेंडेंट न॑ साफ-साफ कही देल॑ छेलै कि ओकरा लगाँ समान ढोय लेली समय नै छै ।

सुशांत तनी देर लेली हतप्रभ रही गेलै । ओंय त॑ ऐसनऽ कुछ नै पुछन॑ छेलै । आखिर जे जरूरी छेलै ओतना त॑ पूछै ल॑ पड़तै । लेकिन फिर भी महिला तरफऽ स॑ ऐन्हऽ प्रतिक्रिया केरऽ अंदेशा नै छेलै । ओंय ऐसनऽ कुछ नै बोलल॑ छेलै कि सामने वाला क॑ लज्जित होय ल॑ पर॑ । उल्टा महिला के मुँहऽ स॑ अपना लेली गंदा-गंदा गाली सुनला के बाद भी सुशांत अपनऽ नाम के मुताबिक एकदम शांत रहलै । ओंय सोची लेन॑ छेलै, प्रतिक्रिया देला स॑ कोय फायदा नै । महिला सहयात्री केरऽ शिकायत भरलऽ लहजा म॑ ओकरा अपमानित करी क॑ भावनात्मक ब्लैकमेलिंग करै के मानसिकता क॑ समझै म॑ सुशांत न॑ देर नै करलकै । महिला के ऊपर गुस्सा करला के बजाय ओकरा तरस आबी रहलऽ छेलै । महिला केरऽ कोय धात काम नै ऐलऽ छेलै । सुशांत न॑ अपनऽ अहम क॑ तनियो टा नै आगू आब॑ देलकै । कंपार्टमेंट के सहयात्री सिनी भी सहमी गेलऽ छेलै । ओकरऽ चिकराहट आगू केकरो हिम्मत नै होलै कि सुशांत के पक्ष म॑ कुछ बोल॑ पार॑ । गलत चीज के विरोध म॑ अगर भीड़ नै खड़ा होय छै त॑ गलत तत्व केरऽ मनोबल बढ़॑ लगै छै । ऐसने मनोबल केरऽ शिकार बाद म॑ भीड़ भी होय जाय छै आरू पल भर म॑ स्वाहा होय जाय छै ।

एक दन्न॑ त॑ सुशांत वू महिला केरऽ हर हरकत क॑ बरदाश्त करी रहलऽ छेलै । दोसरऽ दन्न॑ मने मऽन ओकरऽ विश्वास डगमगाय रहलऽ छेलै ई सोची -सोची क॑ आगू स॑ कोय भी यात्री के प्रति सहृदय भाव स॑ हुनी केना पेश होतै, दोसरा के खास करी क॑ महिला के तकलीफ क॑ समझी क॑ कोच आरू बर्थ अदला-बदली करै ल॑ हरदम तैयार केना होतै । अपनऽ सहृदयता चलतें बेचारा ऐसनऽ स्थिति त॑ कहिय्यो नै पैदा हुअ देतै । सोच॑ लगलै कि बोगी म॑ घुसतैं जो अपनऽ बर्थ प॑ बैठै के जिद करतियै त॑ स्थिति कुछ आरू होतियै । महिलां ओकरा प॑ हावी होय लेली सोच॑ भी नै पारतियै । लेकिन मऽन ई बात प॑ भी बार-बार आबी क॑ टिकी जाय रहै कि एगो के चलतें सब्भे लेली नकारात्मक विचार बनाय लेना कोनो भल्लऽ बात नै । लेकिन एगो बात त॑ साफ छेलै कि पहलऽ बार ओकरा एहसास होलै कि महिला भी अपनऽ छिछोरा हरकत स॑ आदमी क॑ परेशानी म॑ डाल॑ सकै छै ।

सोचत॑-सोचत॑, खैत॑-पीत॑ कखनी सूतै के घड़ी आबी गेलै पता ही नै चललै । लेकिन बोगी म॑ चढ़ै घड़ियाँ स॑ ल॑ क॑ अखनी घड़ियाँ तलक ओह॑ महिला केरऽ हरकत न॑ ओकरऽ मगज म॑ जग्घऽ बनाय लेन॑ छेलै । भर रात ठीक स॑ सूत॑ भी नै पारलै । गहरैलऽ नींद त॑ नै ऐलै । सोत॑-जगत॑ करवट बदली-बदली पटैलऽ रहलै आरू रात कखनी बीती गेलै, पता भी नै चललै ।  भर रात ई बात केरऽ डऽर लगलऽ रहलै कि कखनू भी वू महिला आबी क॑ ओकरा बदनाम करै के मानसिकता स॑ आबी क॑ कहीं कोहराम नै मचाब॑ लाग॑ । सुतला के पहिन॑ सुशांत न॑ जरूर अपनऽ पत्नी क॑ फोन करी क॑ साँझकऽ घटना के बारे म॑ बतलाय देन॑ रहै, जेकरा स॑ कोनो अनहोनी घटला प॑ घटनाक्रम पहिनै स॑ पता रह॑ । अपनऽ दिमाग केरऽ बोझ क॑ हल्का करै लेली भी सुशांत लेली ई जरूरी होय गेलऽ छेलै । पत्नी क॑ बड़ी तकलीफ होलऽ छेलै । फोन प॑ हिदायत देन॑ छेलै, “ऐसनऽ घटना स॑ घबराबै के जरूरत नै छै, हाँ सतर्क जरूर रहना चाहियऽ ।”

राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन अब॑ राजस्थान पहुँची गेलऽ छेलै । तनी देर म॑ यूपी आरू ओकरऽ बाद दिल्ली पहुँचै वाला रहै । कोय वॉश रूम जाय म॑ व्यस्त रहै त॑ कोय अपनऽ समान समेटी क॑ रखै म॑ । सुशांत भी टूथ-ब्रश म॑ पेस्ट लगाय क॑ वॉश रूम दन्न॑ बढ़ै के तैयारी करी रहलऽ छेलै कि सामने स॑ कोच अटेंडेंट ऐतें दिखाय परलै ।लगीच आबी क॑ सुशांत क॑ बतलाब॑ लगलै, “साहेब !  वू जे लेडीज पसेंजर छेलौं आरू ओकरा सथें जे मरदाना पसेंजर छेलौं दूनू जिमा म॑ कोनो टिकट ही नै छेलै । दूनू बोगी म॑ ही कुछ सामान-वमान चोराय-ओराय क॑ बीच के कोनो इसटेशन प॑  उतरी जाय के योजना स॑ राजधानी म॑ चढ़लऽ छेलै । वू त॑ भल्लऽ कहऽ दोसरऽ बोगी के एगो पसेंजर के जेकरऽ शिकायत प॑ पुलिसें ओकरा राथै क॑ पकड़ी क॑ ल॑ गेलै ।”

सुशांत न॑ मोबाईल  केरऽ ईंटरनेट ऑन करी क॑ देखलकै, राजधानी एक्सप्रेस सही समय स॑ तनी टा आगू ही नई दिल्ली दन्न॑ सरपट दौड़लऽ जाय रहलऽ छेलै ।

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