जमुई : गत गुरूवार क॑ यहाँ हास्य कवि सम्मेलन सह बज्मे मुशायरा मं॑ अंगिका हास्य कविता प॑  श्रोता सिनी झूम॑ लागलै ।  ई हास्य कवि सम्मेलन सह बज्मे मुशायरा केरऽ आयोजन कान्यकुब्ज स्वर्णकार संघ केरऽ तरफऽ सं॑ करलऽ गेलऽ छेलै ।

कार्यक्रम केरऽ शुरुआत संघ केरऽ राष्ट्रीय अध्यक्ष शंभु प्रसाद स्वर्णकार एसीसीएफ कोलकाता केरऽ वाचस्पति चौधरी एएलसीसी केरऽ निदेशक डॉ. एमएस परवाज सहित संघ केरऽ वरीय सदस्य सिनी न॑ दीप जलाय क॑ करलकै । खड़ी बोली केरऽ वयोवृद्ध कवि गौरी शंकर मधुप केरऽ कविता हमें कौन ललकारता उतुंग शिखरों से वसंत में, वीरता केरऽ प्रदर्शन केरऽ संदेश देलकै । शिक्षक व उर्दू शायर इरशाद आलम केरऽ प्रस्तुति हथेली नर्म रखिए वरना कंगन टूट जाएगा न॑ खूब ताली बटोरलकै ।

वहीं अंगिका केरऽ नामचीन कवि सुरेंद्र सिंह केरऽ प्रस्तुत कविता सब क॑ सुनी क॑ वहां उपस्थित श्रोता सिनी न॑ मस्ती म॑ गोता लगैलकै । झारखंड स॑ ऐलऽ कवि नरेश वर्मन केरऽ कविता, वसंत का तू ख्वाब न देख, पतझड़ दूर नहीं है आरू नारायण पोद्दार केरऽ प्रस्तुति आओ हम प्रस्थान करें न॑ श्रोता सिनी म॑ जोश भरी देलकै ।

जमुई केरऽ चिकित्सक डॉ. एसएन झा केरऽ हास्य व्यंजना पर आधारित कविता डूबने की तमन्ना है तो बेशक जाइएगा आरू मजकिया अंदाज मं॑ प्रस्तुत चिकित्सक-मरीज संवाद सुनीक॑ श्रोतागण अपनऽ-अपनऽ हंसी नै रोक॑ सकलक॑ । इस शहर के अच्छे लोगों में कुछ लोग बहुत ही गहरे हैं केरऽ प्रस्तुति प॑ डॉ. ललित न॑ ताली बटोरलकै ।

गिद्धौर स॑ ऐलऽ कवि डॉ. विजयेंद्र सत्यार्थी न॑ वसंत केरऽ उन्मुक्त मादकता केरऽ केंद्र मं॑ प्रियतमा केरऽ रूप-लावण्य क॑ गढ़लकै । छिटकल किरिनियां हो गइले विहान के साथ चंद्रकांत पांडेय न॑ किसान सिनी केरऽ जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करलकै । भोजपुरी फिल्मऽ के प्रसिद्ध गीतकार ज्योतिंद्र नाथ मिश्र न॑ नोटबंदी प॑ अबकी समईया बड़ी टान व नारी विमर्श पर आधारित कविता मंगिया न डारिह अबीरबा हो कान्हा सुहागिन कहतै प्रस्तुत करलकै ।

नारी केरऽ विविध स्वरुपऽ के अभिव्यक्ति केरऽ माध्यम बनलै डॉ. नूतन कुमारी । कहलकै, हम वो तारे हैं गुमसुम सा निकल जाते हैं। लाइफ केयर सेंटर केरऽ निदेशक डॉ. एमएस परवाज न॑ बहरूपिए कविता सुनैलकै । शंभुलाल शर्मा, धनपत ¨सह विकल, शंभुशरण ¨सह, रामजपो ¨सह, ई. विशेश्वर यादव, नवनीत कुमार, कामदेव सिंह आदि कवि सिनी न॑ भी काव्य पाठ करलकै ।

समारोह केरऽ अध्यक्षता सत्यनारायण स्वर्णकार न॑ करलकै जबकि मंच संचालन कवि रंजीत सिंह न॑ करलकै ।

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