जीवन म॑ वास्तविक विजयादशमी …

जब॑ संकीर्णता उदारता म॑, क्रूरता करुणा म॑, विचारहीन कुतर्क सृजनात्मक आलोचना म॑ आरू पूर्वाग्रह प्रौढ़ता म॑ परिणत होय जाब॑, तभिये जीवन म॑ वास्तविक विजयादशमी होय छै ।