केवल अच्छा ही होतै

केवल अच्छा ही होतै ।
जों कुछ अप्रिय होय भी रहलऽ छै,
त॑ ई लेली कि प्रकृति —–
आपन॑ क॑ मजबूत बनाय ल॑ चाहै छै।