विशेषण (Adjective) | अंगिका व्याकरण | Angika Grammar | कुंदन अमिताभ

विशेषण (Adjective)

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता या गुण बताते हैं, वे विशेषण कहलाते हैं ।

अंगिका में विशेषण के चार प्रकार हैं –

गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality), संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number), परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity), संकेतवाचक विशेषण (Demonstrative Adjective) या सार्वनामिक विशेषण (Pronoun Adjective), संरचना विशेषण या कृदन्तीय विशेषण (Fructification Adjective)

गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality) – किसी वस्तु या प्राणी के गुण, दोष, रूप, रंग, आकार तथा अवस्था आदि की विशेषता बताने वाले शब्दों को गुणवाचक विशेषण कहते हैं ।

संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number) – जो विशेषण किसी संज्ञा की संख्या या क्रम का बोध कराए, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं ।

इसके दो भेद हैं – (क) निश्चित संख्यावाचक (जैसे – दू, तीन, दसमा, चौथऽ ) (ख) अनिश्चित संख्यावाचक (जैसे – तनी, बेसी )।

परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity) – जिन शब्दों से किसी वस्तु या पदार्थ की मात्रा या नाप-तौल का बोध हो, उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं ।

इसके दो भेद हैं – निश्चित परिमाणवाचक (दू गज कपड़ा, एक सेर प्याज), अनिश्चित परिमाणवाचक- (जैसे – ढेर समान, तनी टा पैसा)

संकेतवाचक विशेषण (Demonstrative Adjective) या सार्वनामिक विशेषण (Pronoun Adjective) – संज्ञा शब्दों की ओर संकेत करने वाले विशेषणों को संकेतवाचक विशेषण या सार्वनामिक विशेषण कहते हैं ।

संरचना विशेषण या कृदन्तीय विशेषण (Fructification Adjective) – जब  गुणवाचक या परिमाणवाचक विशेषण में लऽ लगाया जाता है तो   कृदन्तीय विशेषण का निर्माण होता है । जैसे- टुटलऽ डार, मरलऽ आदमी, सड़लऽ आम, देखलऽ रस्ता ।

विशेष्य – जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं । जैसे – हरियऽ घास । हरियऽ विशेषण है और घास विशेष्य ।

अंगिका में प्रायः विशेषण संज्ञा के आगे और कभी बाद में आता है । जैसे –  किधोर पानी केना पीबऽ ?  कुईयाँ के पानी किधोर छै ।

अंगिका के संज्ञापद की तरह अंगिका के विशेषण के लघु, गुरु और अतिगुरू रूप होते हैं । जैसे –  हरऽ, गोरऽ (लघु) – हरका, गोरका (गुरू) – हरिहरका, गोरकवा (अतिगुरू  या अनावश्यक) ।

तरबन्त या उत्तरावस्था (Comparative Degree), तमबन्त या उत्तमावस्था (Superlative Degree) श्रेणी के तुलनात्मक रूप अंगिका के विशेषणों में नहीं मिलते ।

तरबन्त या उत्तरावस्था (Comparative Degree) श्रेणी के तुलनात्मक रूप के  लिए सें, स॑, से, बेसी, बेशी लगाया जाता है । जैसे – ओकरा सें बेसी धनवान तोंय छो ।

तमबन्त या उत्तमावस्था (Superlative Degree) श्रेणी के तुलनात्मक रूप के लिए सभ में, सभ सें, सभ से, सब से बढ़ी क॑  आदि लगाये जाते हैं । जैसे – हुनी सबसें भल्लऽ अफसर छै ।

समान अवस्था या मूलावस्था (Positive Degree) के लिए रङ्, रकम,ऐन्हऽ,ऐसनऽ, जेन्हऽ, जैसनऽ आदि अव्यय का उपयोग होता है । जैसे – ई चॉर कतरनी रकम ही छै ।