पत्र लेखन (Letter Writing) | अंगिका व्याकरण | Angika Grammar | कुंदन अमिताभ

पत्र लेखन (Letter Writing)

अपनऽ जीवन म॑ पत्र लेखन केरऽ बहुत महत्व छै । पत्र द्वारा अपना सब अपनऽ मनऽ के विचार आसानी सें प्रकट करी क॑ अपनऽ सगा-संबंधी तक पहुँचाब॑ पार॑ छियै । पुराना जमाना म॑ पत्र भेजै के माध्यम मुख्य रूप सें डाकघर होय छेलै । आजकऽ जमाना म॑ अधिकतर पत्र-व्यवहार ई-मेल के माध्यम सें होय छै ।

पत्र लेखन केरऽ शैली व शिल्प के हिसाब सें पत्र या पतरी दू प्रकार के होय छै –
(क) अनौपचारिक पत्र (दोस्त, परिवार केरऽ सदस्य, निकट संबंधी आरनी क॑ लिखलऽ जाय वाला पतरी)
(ख) औपचारिक पत्र (सरकारी, व्यवसायिक, आवेदन या निवेदन, शिकायत, पूछताछ संबंधी काम लेली लिखलऽ जाय वाला पतरी)

पत्र लिखै घड़ियां निम्न बातऽ प॑ ध्यान देना चाहियऽ –
(क) पतरी के भाषा सरल, सरस होना चाहियऽ ।
(ख) जरूरत भर के विस्तार होना चाहियऽ ।
(ग) पतरी केरऽ उद्देश्य आरू विषय आरनि एकदम स्पष्ट होना चाहियऽ ।
(घ) वाक्य छोटऽ-छोटऽ होना चाहियऽ ।
(च) पतरी केरऽ संबोधन, अभिवादन आरू समापन आरनी पत्र केरऽ प्रकार अनुसार प्रचलित पद्धति सें करना चाहियऽ ।