गीतिका

– शवरपा–

ऊचा ऊचा परबत तहि बसहू सबरी बाली ।
मोरंगि पिच्छ  परिहिण शबरी जीवत गुंजरी माली।।
उमत शबरो पागल शबरो माकर गुली गुहाडा ।
तोहारि पिअ धरिणी नामे सहज सुन्दरी ।।
नाना तरूवर मोंउलिल रे गणअत लागें लिडाली ।
एकेलि सबरी ए वण हिंडइ कर्ण कुंडल वज्रधारी ।।
तिअ धाउ खाट पडिला सबेरा महासुहे सेज छाइली ।
सबर भुजंग नैरामणिदारी पेक्खराति पोहाइली ।।
चिऊ ताँबोला महासुहे कापुर खाई ।
सुन नैरामणि कणठे लइआ महासुहे राति पोहाई ।।
गुरू वाक पुंजिआ धनु निअ मण वाणे ।
एके स्वरसंधाने विन्धई विन्धई परम निवाणे ।।
उमत सवेरा गुरूआ रोषे गिरिवर सिहरे संधी ।
मइसन्ते सबरी लोडिब कइसे ।।

Angika Poetry :गीतिका (Geetika)
Poetry from Angika Poetry Book :
Poet :शवरपा  (Savrapa )

Reference Books / Articles : Hindi Kavya Dhara -  Mahapandit Rahul Sankritiyan, Angika Bhasha Aour Sahitya (Panchdash Lokbhasha Nibandhavali - Published by Bihar Rashtrabhasha Parishad, Patna in the year 1960) - Dr. Maheshwari Singh Mahesh

गीतिका – शवरपा

गीतिका – शवरपा

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