नई दिल्ली । ५ नवंबर, २०१८  । आय विभिन्न भारतीय भाषा-भाषी समूह केरऽ कार्यकर्ता सब द्वारा जंतर-मंतर प॑  एक दिवसीय धरना धरी क॑ सीताकांत महापात्रा समिति द्वारा अनुशंसित ३७ भाषा क॑ अष्टम अनुसूची म॑ तुरंत शामिल करै के सरकार स॑ आग्रह करलऽ गेलै ।

देश केरऽ लोकतांत्रिक व्यवस्था म॑ विश्वास रखत॑ हुअ॑ एकात्मक व सामूहिक रूप सें सरकार स॑ माँग करलऽ गेलै  कि बर्ष २००४ म॑ सीताकांत महापात्रा समिति द्वारा अनुशंसित अंगिका, भोजपुरी, कोसली समेत ३७ भाषा क॑ भारतीय संविधान केरऽ अष्टम अनुसूची म॑ तुरंत शामिल करलऽ जाय ।

पिछला कुछ दशक के दौरान केंद्र सरकार न॑ स्वंय द्वारा गठित विभिन्न समिति सब के सिफारिश प॑ संविधान केरऽ आठमऽ अनुसूची म॑ विभिन्न भारतीय भाषा क॑ शामिल करल॑ छै । हालाँकि, जैन्हऽ कि सरकार के ही कहना छै कि ऐसनऽ करै म॑ कोय भी निश्चित मानक मापदंड केरऽ पालन नै करलऽ गेलऽ छै । भारतबर्ष केरऽ भाषाई विविधता केरऽ जटिलता क॑ समझी करी क॑  भाषा सब क॑ अष्टम अनुसूची म॑ शामिल करै के मान्यता दै म॑ भारत सरकार तरफऽ स॑ अपनैलऽ गेलऽ लचीला रवैया दरअसल ई मामला म॑ मूल्यांकन आरू निर्णय म॑ सावधानी आरू विवेकपूर्ण ढंग स॑ अनावश्यक मुश्किल स॑ बचै के उनकऽ समझदारी क॑ ही दर्शाबै छै ।

भारतबर्ष के विभिन्न भाषा समुदाय केरऽ कार्यकर्ता सिनी न॑ आय धरलऽ धरना म॑ अपनऽ-अपनऽ विचार व्यक्त करी क॑ आशा व्यक्त करल॑ छै कि कि २००४ में सीताकांत महापात्रा समिति द्वारा अनुशंसित ३८ भाषा म॑ स॑ अंग्रेजी क॑ छोड़ी क॑ शेष ३७ भाषा क॑ संविधान केरऽ आठमऽ अनुसूची म॑ शामिल कर॑ जे कि बरसों-बरस सें अनुशंसित होय क॑ केंद्र सरकार के अधीन मान्यता दै के प्रक्रिया में लंबित छै । सीताकांत महापात्रा समिति द्वारा अनुशंसित भाषा केरऽ वर्तमान सूची में शामिल छै : अंगिका, बंजारा,  बज्जिका, भोजपुरी, भोटी, भोटिया, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी, धातकी, कोसाली, गढ़वाली (पहाड़ी), गोंडी, गुज्जर / गुज्जरी, हो, कच्छी,  कामतपुरी, करबी, खासी,  कोडवा (कूर्ग) , कोक बराक, कुमाँउनी (पहाड़ी), कुरक, कुर्माली, लेप्चा, लिंबू, मिजो (लुशाई), मगही, मुंडारी, नागपुरी, निकोबारी, पहाड़ी (हिमाचल), पाली, राजस्थानी, शौरसेनी (प्राकृत), सिरैकी, टेनेडी, तुलु ।

धरना म॑ ई बात पर भी जोर देलऽ गेलै कि २००४ में सीताकांत महापात्रा समिति द्वारा अनुशंसा के पश्चात भी जों अगर कोनो भाषा समुदाय के भाषा क॑ सूची म॑ जोड़ै लायक समझलऽ गेलऽ छै त॑  अनुशंसित सूची क॑ यथाशीघ्र अद्यतन करलऽ जाय ।

ऐसनऽ कहलऽ जाय छै कि मातृभाषा केरऽ अधिकार वू लोगऽ सिनी के मूल सांस्कृतिक अधिकार छेकै जे ओकरा अपनऽ अर्थव्यवस्था, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रणाली आरू राजनीतिक अधिकार स॑ जोड़ै छै । यूनेस्को न॑ ई तथ्य क॑ आधिकारिक रूप सें मान्यता देल॑ छै कि सब्भे भाषा सब म॑ भाषा समानता के अवधारणा महत्वपूर्ण छै । चाहे वू भाषा केरऽ अपनऽ कोय लिपि रह॑ या नै ।

एतने नै, वर्तमान भारत सरकार न॑ भी दावा करल॑ छै कि हुनी स्कूल छोड़ै के दरऽ क॑ कम करै लेली मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा क॑ बढ़ावा देतै । ई परिप्रेक्ष्य म॑ अपील करलऽ गेलै कि सब भाषा समुदाय केरऽ समान रूप स॑ विकास लेली भारतीय संविधान केरऽ आठमऽ अनुसूची म॑ शामिल करै लेली अनुशंसित करलऽ गेलऽ ३७ भाषा क॑ एकरा म॑ शीघ्र अतिशीघ्र शामिल करलऽ जाय ।

जंतर-मंतर प॑ आयोजित धरलऽ गेलऽ धरना म॑ अंगिका, भोजपुरी, कोसली, पंजाबी आदि भाषा समूह केरऽ प्रतिनिधि सिनी न॑  अपनऽ विचार व्यक्त करलकै । प्रमुख वक्ता म॑ शामिल छेलै –  श्री जोगा सिंह विर्क, अध्यक्ष, सी.एल.ई.ए.आर., साकेत साहू , संस्थापक सदस्य, सी.एल.ई.ए.आर, कुंदन अमिताभ, संस्थापक – अंगिका.कॉम, संस्थापक महासचिव – अखिल भारतीय अंग-अंगिका विकास मंच, दिलीप कुमार पसायत, घनश्याम बापटी, राजाराम केडिया, अमरेश सेनापति, आकाश साहू, शशिधर मेहता- संयोजक – अंगिका जन जागरण अभियान, दिव्य नाग, बेलोचन नायक, किशोर पोध, हरेंद्र स्वैन, प्रसून लतांत आरू सुनील कुमार ।

धरना पश्चात प्रेस क्लब ऑफ इंडिया म॑ आयोजित प्रेस बैठक म॑ प्रेस क॑ संबोधित करै वाला म॑ शामिल छेलै :- श्री जोगा सिंह विर्क, डॉ. सुनील कुमार तिवारी, हेमंत कुमार हिमांशु,  कुंदन अमिताभ, साकेत साहू , दिलीप कुमार पसायत ।

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