पटना : बिहार अंगिका अकादमी एक अदद कार्यालय लेली तरसी रहलऽ छै । जबकि बिहार अंगिका अकादमी केरऽ गठन के लगभग ६ महीना बीती चुकलऽ छै । इ बाबत अंगिका साहित्यकार सीनी केरऽ बैठक विभुरंजन केरऽ अध्यक्षता में २ जनवरी क॑ पुनाईचक, पटना में होलै । जेकरा में सरकार सें अविलंब कार्यालय उपलब्ध कराबै के माँग करलऽ गेलऽ छै ।साहित्यकारऽ सिनी के कहना छै कि कार्यालय के अभाव में अकादमी केरऽ विस्तार नै हुअ॑ पाबी रहलऽ छै ।

साहित्यकार सिनी न॑ आसंका जतैने छै कि इ नवगठित अकादमी सथें सुनियोजित साजिस रचलऽ जाय रहलऽ छै । ताकि अंगिका अकादमी के माध्यम सें अंगिका भासा आरू संस्कृति क॑ संरक्षित आरू संवर्द्धित करला सें रोकलऽ जाब॑ सक॑ ।

अंगिका साहित्य कला मंच केरऽ बैठक के अध्यक्षता करतें  एकरऽ संयुक्त सचिव विभुरंजन न॑ कहलकै कि माननीय मुख्यमंत्री नीतिश कुमार न॑ पूर्वी आरू उत्तर पूर्वी बिहार केरऽ मुख्य भासा अंगिका क॑ बोलै वाला केरऽ सम्मान करतें हुअ॑ अंगिका अकादमी केरऽ गठन करी क॑ एकरऽ अध्यक्ष भी मनोनित करी देलकै । एकरऽ बावजूद अंगिका अकादमी लेली कार्यालय उपलब्ध नै कराना चिंता केरऽ बात छेकै ।मुख्यमंत्री न॑ अंगिका क॑ सम्मान देन॑ रहै जेकरऽ फलस्वरूप अंगिका भासा-भासी न॑ पुरजोर वोट करी क॑ नीतिश कुमार में विस्वास व्यक्त करलकै । लेकिन अंगिका भासा-भासी अब॑ अपना क॑ ठगलऽ महसूस करै लगलऽ छै ।

साथी सुरेश सूर्य न॑ कहलकै कि कार्यालय नै होला सें अंगिका अकादमी केरऽ विस्तार आरू कार्यक्रम अवरूद्ध छै । सूर्य न॑ कहलकै कि अंगिका पूर्वी बिहार, पूर्वी-उत्तरी बिहार, झारखंड केरऽ संथालपरगना क्षेत्र के लोगऽ के मातृभासा छेकै । एकरऽ समृद्ध साहित्य आरू संस्कृति बरसों सें उपेक्षित रहलऽ छै । नीतिश कुमार न॑ एकरा संरक्षित आरू एकरा फल॑-फूल॑ दै के वास्तें जे कदम उठैने छै। ओकरा मुट्ठी भर अधिकारी दबाय क॑ सरकार के विरूद्ध कूटनीतिक सडयंत्र रची रहलऽ छै ।

प्रो. डॉ. दिवाकर न॑ कहलकै कि उपेक्षित भासा, संस्कृति, साहित्य आरू धरोहर क॑ संरक्षित करै वास्तें सरकार फंड उपलब्ध कराबै छै । फेरू अधिकारी सब के साँस कैन्हें फूली रहलऽ छै, इ समझ सें परे छै । हुनी कहलकै कि इ भासा के पढ़ाय स्नातकोत्तर स्तर पर बिहार केरऽ तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर आरू झारखंट केरऽ दुमका विश्वविद्यालय में होय छै ।

 

 

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