अबरी दाफी

अंगिका को अष्टम अनुसूची में शामिल करने की आनाकानी समझ से परे

यह एक अनबूझ पहेली सी ही है कि बिहार, झारखंड, पं. बंगाल के लगभग छह करोड़ भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली भाषा अंगिका को अब तक भारत के संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है. जबकि तथ्य यह है कि विश्व के प्राचीनतम भाषाओं में से एक अंगिका भारत के अलावा नेपाल, कंबोडिया, वियतनाम, लाओस आदि देशों में बोली जाने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है. यह एक अत्यंत गंभीर और विचारणीय विषय है कि आजादी के इतने बरसों के बाद भी एक विशाल जनसमुदाय की भाषा अंगिका अपने वाजिब हक से वंचित क्यों है. पर्याप्त पात्रता और ठोस आधार होने के बावजूद अंगिका को अष्टम अनुसूची में शामिल करने में भारत सरकार द्वारा किया जा रहा अप्रत्याशित विलंब समझ से परे है. अष्टम अनुसूची में भाषा को शामिल करने हेतु निर्धारित मापदंड भारत सरकार द्वारा कोई भी भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल करने के लिये कुछ निर्धारित मापदंड अपनाये… Read More

सुखरात मॆं आतिशबाजी सॆं निजात

सुखरात मॆं आतिशबाजी सॆं निजात

हर साल जबॆ सुखरात (दिवाली) आबै वाला रहै छै आरू आबी कॆ चल्लॊ जाय छै, इ मुद्दा चरम चर्चा मॆ रहै छै कि आतिशबाजी आरू आतिशबाजी जनित प्रदूषण सॆं केना निजात पैलॊ जाय. तरह-तरह के तर्क-वितर्क, तरह-तरह के बयानबाजी, तरह-तरह के पाबंदी के दौर चलै छै. तमाम तरह के विनम्र आग्रह भी करलॊ जाय छै. शुरू मॆ एन्हॊ प्रतीत होय छै कि शायद अबरी दाफी आतिशबाजी नियंत्रण मॆं रहतै. एन्हॊ भी अनुमान लगै छै कि बढ़तॆं मँहगाई के चलतॆं एकरा पर कुछू लगाम लगतै. धीर मॊन अधीर होय जाय छै जबॆ सब चीज कॆ धता बतलैतॆं छोटी दिवाली के रात सॆं ही आतिशबाजी केरॊ अंतहीन सॆं नजर आबै वाला दौर शुरू होय जाय छै. करोङॊं रूपया आगिन मॆं झोंकी देलॊ जाय छै. भारतीय क्रिकेट टीमॊ द्वारा विभिन्न अन्तराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, आय.पी. एल. मैच जीतला पर आतिशबाजी केरॊ प्रदर्शन तॆं होतै छै,  पर दिवाली मॆं आतिशबाजी आपनॊ चरम पर रहै छै. एकरा सॆं कि इ  बात  साफ होय  छै कि आतिशबाजी आरो आतिशबाजी जनित… Read More

When could one be able to produce Angika Cinema?

The fact of contempt of Angika Language by Visual & Audible Media like Doordarshan and Aakashvani is no more hidden. If I speak of film making in Angika in to my knowledge, no such effort has been made yet toward it till date. In Bihar, Aakashvani Patna Centre has just celebrated its golden jubilee on 26 th Jan, 1997. There was a new hope in public of Bihar when on 26th Jan, 1947, the Home Minister and Information and Telecast Minister then, Sardar Vallabh Bhai Patel, inaugurated this important centre. People thought that under the right of equality, all regional languages and regional cultures’ programmes will get equal opportunity among the programs telecasted from this centre. But event after elapsing of 50 years, such equality has not been maintained. Rather, no such exercise was performed for doing the same. Angika , the language of over 3 crore population of Bihar has not been placed under… Read More

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