2 months ago
उधाडीह गाँव मँ मनैलौ गेलै शौर्य चक्रधारी अंग गौरव शहीद निलेश कुमार नयन केरौ शहादत दिवस | New in Angika
2 months ago
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मँ जग्घौ बनाबै लेली आय 122 भाषा के गाना कार्यक्रम मँ अंगिका मँ भी गैतै पुणे केरौ मंजुश्री ओक | News in Angika
3 months ago
अंगिका भाषा क आठमौ अनुसूची मँ दर्ज कराबै लेली दिसम्बर मँ दिल्ली मँ होय वाला आन्‍दोलन क सफल बनाबै के करलौ गेलै आह्वान | News in Angika
3 months ago
अंगिका आरू हिन्दी केरौ वरिष्ठ कवि व गीतकार, कविरत्न महेन्द्र प्र.”निशाकर” “दिनकर सम्मान” सँ सम्मानित  | News in Angika Angika
3 months ago
चाँद पर विक्रम लैंडर के ठेकानौ के लगलै पता, पर अखनी नै हुअय सकलौ छै संपर्क | ISRO found Vikram on surface of moon, yet to communicate | Chandrayaan 2 | News in Angika

अंग-प्रसंग

इंगलैंड के अंतर्राष्ट्रीय बहुभाषीय संगोष्ठी में अंगिका भाषा : अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अंगिका भाषा का प्रथम व्याख्यान

इंगलैंड के अंतर्राष्ट्रीय बहुभाषीय संगोष्ठी में अंगिका भाषा : अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अंगिका भाषा का प्रथम व्याख्यान

बरमिंघम : अंगिका भाषा साहित्य के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा गया है. इंगलैंड के दूसरे सबसे बङे शहर बरमिंघम में 27 से 29 अगस्त तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बहुभाषीय संगोष्ठी, IMS-2005, में अंगिका के साहित्यकार श्री कुंदन अमिताभ द्वारा अंगिका भाषा में आलेख और कवितायें पढीं गईं. किसी विदेशी भूमि पर आयोजित किसी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में अंगिका भाषा की रचनायें पढी जाने का यह पहला मौका था. श्री अमिताभ को संगोष्ठी में अंगिका एवं अंग्रेजी में अपनी रचनायें पढ़ने के लिये विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था. उनकी इस ऐतिहासिक भागीदारी से बिहार एवं अंग की संस्कृति तथा अंगिका भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान हासिल हुई है. [wzslider autoplay=”true”] बिड़ला इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले हिन्दी, अंग्रेजी एवं अंगिका के लेखक श्री कुंदन अमिताभ पिछले चौबीस बर्षों से अंगिका-साहित्य सृजन में लगे हैं और फिलहाल मुम्बई के एक कंसल्टिंग कम्पनी में सीनीयर रेजीडेंट इंजीनियर के… Read More

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य

केवल लिखित साहित्य को ही आधार मानें तो अंगिका भाषा में साहित्य निर्माण की समृध्द परम्परा प्राचीन काल से ही सतत रूप से जारी है, जो प्रामाणिक रूप से पिछले तेरह सौ वर्षों के कालखंडों में बिखरा पड़ा है. महापंडित राहुल सांकृत्यायन के अनुसार हिन्दी भाषा के लिखित साहित्य का प्राचीनतम स्वरूप ‘अंग’ के प्राचीन सिध्द कवि ‘सरह’ की आठवी सदी में लिखी अंगिका-अपभ्रंश भाषा की रचनाओं में उपलब्ध है. अगर वैदिक संस्कृत में सृजित साहित्य के प्रारंभिक वर्षों को भारतीय भाषाओं में साहित्य लेखन की शुरूआत मानी जाय तो ‘अंगिका’ भाषा में साहित्य निर्माण का कार्य आज से चार हजार वर्ष पूर्व शुरू हो चुका था. अंगिका में लिखित एवं अलिखित दोनों ही तरह के साहित्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं. आज की स्थिति यह है कि अंगिका भाषा का अपना वेब पोर्टल अंगिका.कॉम बर्ष 2003 से अस्तित्व में हैं. साथ ही अंगिका भाषा में गुगल.क़ॉम जैसा विश्व के अव्वल दर्जे का सर्च इंजन… Read More

error: Content is protected !!