अंगिका कविता

दोहा – सरह / सरहपा

दोहा – सरह / सरहपा

दोहा – सरह / सरहपा– जाव ण आइ जणिज्जइ, तखम सिस्स करेई। अन्धाँ अन्ध कठाव तिम, वेणण कि कूव पडेई ।। णउतं बाआहि गुरू कहइ, णउतं बु ज्झई सीस । सहजा मिअ-रसु सकल जग, कासु कहिज्जइ कीस ।। Angika Poetry : दोहा (Doha) Poetry from Angika Poetry Book : दोहाकोश (Dohakosh) Poet :सरह / सरहपा  (Sarah / Sarahpa ) Reference Books /[Read More...]

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य – कुंदन अमिताभ – Email : kundan.amitabh@angika.com , Mobile : 9869478444 केवल लिखित साहित्य को ही आधार मानें तो अंगिका भाषा में साहित्य निर्माण की समृद्ध परम्परा प्राचीन काल से ही सतत रूप से जारी है, जो प्रामाणिक रूप से पिछले तेरह सौ वर्षों के कालखंडों में बिखरा पड़ा है. महापंडित राहुल सांकृत्यायन के अनुसार[Read More...]

कश्मीर केरॊ लॊर

कश्मीर केरॊ लॊर

कश्मीर केरॊ लॊर —– कुंदन अमिताभ —– नद्दी उफनी-उफनी कॆ शहर मॆं बहै छै लहू अबॆ नस मॆं नै सङक पर बहै छै. डार सुखलॊ प्यार के पत्ता झरी गेलै बीयाबानॊ मॆं ऐन्हे जालिम हवा बहै छै. धूरा-बवंडर मॆं लेबझैलॊ शहरॊ के पॊर कोरे-कोर धोधैलॊ रेत बेसुमार बहै छै. कन-कन ठार जिगर धुंध कोहासॊ सगर जेहादी धार मॆं स्वर्ग व[Read More...]