अंगिका कविता

झिंगली केरऽ फूल

झिंगली केरऽ फूल

झिंगली केरऽ फूल — कुंदन अमिताभ — गम – गम गमकी रहलऽ छै झिंगली केरऽ फूल गोधूलि बेला लगीच छै देहरी – भंसा घूमी करी संकेत द॑ रहलऽ छै झिंगली केरऽ फूल । धोरैय ऐतै – बैहारी दन्नं॑ सं॑ चराना बंद करी क॑ माल – जाल क॑ बथानी केरऽ नादी मं॑ जोरी देतै दोले – दोल भरी क॑ राखलऽ छै[Read More...]

ईश्वर – अल्लाह

ईश्वर – अल्लाह

ईश्वर – अल्लाह — कुंदन अमिताभ — मंदिर मस्जिद मं॑ वू अँटै छै कहाँ धरम केरऽ खाना मं॑ बँटै छै कहाँ । वू त॑ सगरे ऐंजाँ-वैंजाँ  जैंजाँ-तैंजाँ कोनो एक्के जग्घऽ प॑ डटै छै कहाँ । बस्ती मं॑ लागलै आगिन उठलै धुआँ नै पता मरतै आय वू कहाँ – कहाँ  । सपना सब्भे मरी गेलै होय क॑ लहुलुहान मस्जिद अजान मंदिर[Read More...]

पूलऽ पर के आदमी

पूलऽ पर के आदमी

पूलऽ पर के आदमी — अचल भारती — ई दुनियाँ एक पूल छेकै जै पूलऽ के दोनों मँहऽ पर लिखलऽ छै — ‘बंद’ उपर छै खाली आकाश नीचें फकत बालू के रेत आरो पूलऽ पर उमड़लऽ छै आदमी रऽ समुंदर आदमी रऽ उड़ै छै मऽन धूरा नाखी उपर आरू आदमी रऽ तपै छै जीवन बालू के रेता नांखीं आरू आदमी[Read More...]

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव —डा. नरेश पांडेय चकोर — नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ बुली-बुली क॑ खाय लाय आपन्हौं खाय कौआ खिलाय कौआ बोल॑ काँव-काँव ॥ नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ बुललऽ-बुललऽ द्वारी जाय दिय॑ कुतिया क॑ मारी भगाय कुतिया बोल॑ झाँव-झाँव ॥ नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ नुनुआ खाय दूध-भात बिल्ली मौंसी कर॑ झात बोल मिठ्ठऽ म्याँव-म्याँव ॥ नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥ बुललऽ-बुललऽ[Read More...]

गरमैलऽ छै कलम

गरमैलऽ छै कलम

गरमैलऽ छै कलम — विद्याभूषण सिंह ‘वेणु’ — के कहै छै कि इ नरमैलऽ छै कलम । सावधान रे कि इ गरमैलऽ छै कलम । धरती क॑ नञ देख॑ बुरा नजरऽ सें आकाशें, कि जुल्मी क॑ मिटाय ल॑ इ उमतैलऽ छै कलम । मालूम जोंकऽ क॑ कि खून आरो भी छै पीयै वाला, कि रोशनाय सें जादे इ खून पिलैलऽ[Read More...]

रूप निहारै ऐना मं॑

रूप निहारै ऐना मं॑

रूप निहारै ऐना मं॑ — भूदेव प्रसाद शर्मा ‘ भूषण ‘ — ऐना रंग चान चमकै छै अँगना मं॑ । सजलऽ रूप रंग चान सन मुख दमकै छै घोंघा मं॑, छिटकै दुघिया बदन सं॑ झकझक इंजोरिया साजन आबै सपना मं॑, लऽ औंगरी रऽ लाल लाल हाथऽ मं॑ मेंहदी रऽ निखार, कसमस बदन पर कुचुकी उभार, रूप निहारै नवोढ़ी रही –[Read More...]

विरह गीत

विरह गीत

विरह गीत — नरेश जनप्रिय — बदरा भैया हो लेनें जा हमरऽ ई सनेश । पियवा भुलैलै पता नै जाय कोन देश ॥ कही दिहौ जाय क॑ हमरऽ ई बतिया बिरहा में फाटै छै रात-दिन छतिया बेरथ होलऽ जाय छै हमरऽ जिन्दगानी तड़पी क॑ रात काटौं आरो दिन कानी कही दिहौ आबी देतै पलो भर दरेस बदरा भैया हो लेनें[Read More...]

जत्त॑ हटकै

जत्त॑ हटकै

जत्त॑ हटकै — मथुरानाथ सिंह ‘रानीपुरी’ — कौआ काँव-काँव कुत्ता भूकै दिन अन्हरिया रात नै सूझै हड़हड़ – गड़ग़ड देहे झूलै काँटऽ कूशऽ सगठें फूलै  । सनफन पिल्लू पेट्हें कोंचै जीत्ते मुर्दा गीधें नोचै माटी टूटलै धूरा फटकै बाहरें खनखन भीतरें चटकै । चिड़िया गुमसुम बाझहें गटकै इ बलजोरी अपन्हैं ढचकै य़हो डकार ‘रानीपुरी ‘अपनऽ गाड़ी के पहिया जत्त॑ हटकै[Read More...]

विदाई गीत

विदाई गीत

विदाई गीत — श्रीभगवान प्रलय — पोखरी किनारी होय क॑ चलिहें रे कहरा देखी लेबै बाबा के बहियार रे । की जानौं कहिया तक लौटबै नैहरबा कब तक बसबै ससुरार रे । कान दोनों पीन्हैं छेलाँ सरसों के बाली दुभड़ी अंगूठी पोरे – पोर रे । डिकरी-डिकरी कानै गैया-बछड़ुआ देतै कौनें ओकरा आहार रे । सुपती खोसलों खेली भनसा ओसरबा[Read More...]

भादऽ के झांकी

भादऽ के झांकी

भादऽ के झांकी — नरेश जनप्रिय — रिमझिम पड़ै छै बूँद फुहार देखौ भादऽ मं॑ हरिहर लागै समूच्चा बहियार देखौ भादऽ मं॑ । मेघो गरजै बिजली चमकै बेग्हौं शोर मचाबै पोखर नद्दी लबालब, मोरबा-मोरनी नाच देखाबै झिंगुर करै छै खूब झनकार देखौ भादऽ मं॑ रिमझिम पड़ै छै बूँद फुहार देखौ भादऽ मं॑ । कन्हौं कतरनी कन्हौ स्वर्णा खेतऽ मं॑ शोभै[Read More...]