आधुनिक अंगिका साहित्य

सप्तश्लोकी दुर्गा

सप्तश्लोकी दुर्गा

जबॆ भगवान शंकर आग्रह करलकै कि हे देवी दुर्गा! तोंय भक्तसुलभ,सर्वकार्यविधायिनी, बताबॊ कलयुग मॆ कामनासिद्धि  के उपाय वृहत आरू वर्णनीय. तॆ देवी बोललै कि हे देव ! जरूर कलयुग मॆ (कार्य) कामनासिद्धि  के श्रेष्ठ उपाय बतलैबै, आपनॆ के स्नेहवश इ श्रेष्ठ साधन, ‘अम्बा स्तुति’ कॆ जगजाहिर  करबै.   सचमुच देवी भगवती ऐन्हॆ छै- भगवती महामाया देवी ज्ञानियॊ के मन कॆ[Read More...]

सुखरात मॆं आतिशबाजी सॆं निजात

सुखरात मॆं आतिशबाजी सॆं निजात

हर साल जबॆ सुखरात (दिवाली) आबै वाला रहै छै आरू आबी कॆ चल्लॊ जाय छै, इ मुद्दा चरम चर्चा मॆ रहै छै कि आतिशबाजी आरू आतिशबाजी जनित प्रदूषण सॆं केना निजात पैलॊ जाय. तरह-तरह के तर्क-वितर्क, तरह-तरह के बयानबाजी, तरह-तरह के पाबंदी के दौर चलै छै. तमाम तरह के विनम्र आग्रह भी करलॊ जाय छै. शुरू मॆ एन्हॊ प्रतीत होय छै कि शायद[Read More...]

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य

अंगिका भाषा का साहित्यिक परिदृश्य – कुंदन अमिताभ – Email : kundan.amitabh@angika.com , Mobile : 9869478444 केवल लिखित साहित्य को ही आधार मानें तो अंगिका भाषा में साहित्य निर्माण की समृद्ध परम्परा प्राचीन काल से ही सतत रूप से जारी है, जो प्रामाणिक रूप से पिछले तेरह सौ वर्षों के कालखंडों में बिखरा पड़ा है. महापंडित राहुल सांकृत्यायन के अनुसार[Read More...]

कश्मीर केरॊ लॊर

कश्मीर केरॊ लॊर

कश्मीर केरॊ लॊर —– कुंदन अमिताभ —– नद्दी उफनी-उफनी कॆ शहर मॆं बहै छै लहू अबॆ नस मॆं नै सङक पर बहै छै. डार सुखलॊ प्यार के पत्ता झरी गेलै बीयाबानॊ मॆं ऐन्हे जालिम हवा बहै छै. धूरा-बवंडर मॆं लेबझैलॊ शहरॊ के पॊर कोरे-कोर धोधैलॊ रेत बेसुमार बहै छै. कन-कन ठार जिगर धुंध कोहासॊ सगर जेहादी धार मॆं स्वर्ग व[Read More...]